लंदन:
लॉर्ड्स मैदान के कार्यकर्ताओं का व्यवहार आश्चर्यजनक रूप से खुशनुमा है। हालांकि उनका व्यवहार हमेशा अच्छा नहीं रहता है और सुनील गावसकर आपको इस बारे में ज्यादा अच्छे से बता सकते हैं, जिन्हें 1990 में स्टेडियम में घुसने से रोक दिया गया था। वैसे मुझे ऐसा कोई अनुभव नहीं हुआ और मैं पूरे स्टेडियम में आराम से घूमता रहा।
क्रिकेट इतिहासकार लॉर्ड्स को क्रिकेट का आध्यात्मिक घर कहते हैं, लेकिन जब से एशिया क्रिकेट का पावर हाउस बना है, कुछ इतिहासकारों के मत में भिन्नता का अनुभव होता है। मेरे हिसाब से भारतीय दर्शकों की क्रिकेट के प्रति दीवानगी को देखते हुए ईडन गार्डन को या फिर अपने सुरुचिपूर्ण सौंदर्य के कारण वेस्टइंडीज के क्वींस पार्क ओवल मैदान को क्रिकेट का मक्का कहना ज्यादा उचित होगा। फिर भी लॉर्ड्स हमेशा से एक बहुत ही प्यारा मैदान रहा है। इसमें वह प्रसिद्ध बालकनी है, जहां कपिल ने 1983 में वर्ल्ड कप की ट्रॉफी ग्रहण की थी और सौरव गांगुली ने 2002 में नेटवेस्ट कप जीतने के बाद अपनी शर्ट लहराई थी।
कपिल व मांकड़ दोनों महान
लॉर्ड्स मैदान भारतीय क्रिकेट के कई यादगार प्रदर्शनों का भी मेजबान रह चुका है। सबसे अच्छा 1983 वर्ल्ड कप जीतना था। इसके साथ ही एक और भारतीय खिलाड़ी है वीनू मांकड़। उन्होंने 1952 में लॉर्ड्स टेस्ट में जो प्रभाव छोड़ा था, उसकी बराबरी करना किसी के लिए भी आसान नहीं है। मांकड़ ने इस मैच की पहली पारी में 72 रन बनाए, उसके बाद पांच विकेट लिए। दूसरी पारी में 184 रन बनाए और 24 ओवर गेंदबाजी करते हुए मात्र 32 रन दिए। इंग्लैंड यह मैच आठ विकेट से जीत गया, लेकिन इस मैच को ‘मांकड़ टेस्ट’ के नाम से जाना जाता है।
क्रिकेट जगत में अब भी इस बात पर बहस होती है कि कपिल और मांकड़ में से महान ऑलराउंडर कौन है? यह बहस निराधार है, मुझे लगता है कि दोनों एक समान महान खिलाड़ी थे।