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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़:
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रिश्वत लेने के मामले में सुर्खियों में आए चंडीगढ़ के पूर्व सिविल जज (जूनियर डीवीजन) एसएस भारद्वाज के सुनाए सभी फैसलों पर दोबारा से सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। भारद्वाज ने लगभग 125 मामलों के फैसले पर दस्तखत नहीं किए थे। हाईकोर्ट ने सभी मामलों से जुड़े विवाद को संबंधित कोर्ट के सामने पेश करने को कहा है।
चीफ जस्टिस विजेंद्र जैन और जस्टिस महेश ग्रोवर की बैंच ने यह आदेश शुक्रवार को दिया। अपने आदेश में बैंच ने यह भी कहा, किसी भी कोर्ट में सुनाया गया फैसला तब तक अंतिम नहीं माना जा सकता जब तक जज उस फैसले पर दस्तखत नहीं कर दे। बैंच ने कहा कि जज एसएस भारद्वाज ने न केवल न्यायपालिका जैसी संस्था के साथ जालसाजी की है, बल्कि संस्था की साख पर धब्बा भी लगाया है।
गौरतलब है कि चंडीगढ़ जिला कोर्ट के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) एसएस भारद्वाज को 2003 में सीबीआई ने रिश्वत लेने के मामले में पकड़ा था। भारद्वाज इस समय निलंबित हैं। पकड़े जाने से पहले भारद्वाज के कर्मचारियों से 125 ऐसे मामलों की फाईलें बरामद की गई जिनके फैसले पर जज ने दस्तखत नहीं किए थे। इनमें से कुछ फैसले कोर्ट में सुनाए जा चुके थे। ऐसे ही एक मामले में एक पक्ष ने भारद्वाज के दिए गए फैसले को लागू करने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उसी याचिका पर सुनवाई के बाद बैंच ने शुक्रवार को फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट जज के लिए तीन नाम क्लीयर
चंडीगढ़:
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में जज के रूप में नियुक्ति के लिए हाईकोर्ट कॉलिजीयम द्वारा भेजे गए 7 नामों में से केवल एडवोकेट आरके जैन, आरके गर्ग और केएस आहलुवालिया के नाम पर ही सुप्रीम कोर्ट कॉलिजीयम ने मुहर लगाई है। सूत्रों के अनुसार इन तीनों के नामों की रिकमंडेशन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के विदेश से लौटते ही कर दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के तीन वरिष्ठ जजों के कॉलिजीयम ने एडवोकेट रणधीर सिंह और एडवोकेट जसवंत फोगाट के नाम रिजेक्ट कर दिए हैं। दोनों के नाम हरियाणा कोटे से भेजे गए थे। पंजाब के सीनियर डिप्टी एडवोकेट जनरल एजी मसीह और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल दया चौधरी के नाम पेंडिंग हैं। दया चौधरी हरियाणा, मसीह पंजाब कोटे से हैं।
जैन पर नकारात्मक टिप्पणियां : सुप्रीम
कोर्ट द्वारा रिकमेंड तीन वकीलों में से एडवोकेट आरके जैन के बारे में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट कॉलिजीयम के सदस्य जस्टिस जेएस खेहर ने नकारात्मक टिप्पणियां की थीं। एडवोकेट आरके जैन के बारे में जस्टिस खेहर ने लिखा था कि मुझे एडवोकेट आरके जैन की निष्ठा पर संदेह है। जस्टिस खेहर ने लिखा था कि मुझे कुछ वकीलों ने बताया एडवोकेट जैन ने उन्हें उनके क्लाइंट के केस का विरोध न करने के एवज में पैसे देने की पेशकश की थी। वह औसत से नीचे (बीलो एवरेज) के एडवाकेट हैं।
जस्टिस खेहर द्वारा एडवाकेट जैन के खिलाफ दी ऐसी टिप्पणीयों के कारण चीफ जस्टिस विजेंद्र जैन को एडवोकेट जैन के बारे में हाईकोर्ट के तीन अन्य जजों से राय लेनी पड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट ने जिन तीन नामों की रिकमंडेशन की है उन्हें अब आगे रिकमंडेशन के लिए लॉ मिनिस्ट्री भेजा जाएगा। लॉ मिनिस्ट्री से मुहर लगने के बाद ही उन्हें अंतिम मुहर के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में इस समय जजों के 19 पद खाली हैं। हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत पदों की संख्या 53 है जबकि इस समय हाईकोर्ट में 34 जज ही नियुक्त हैं।