लॉर्डस: टीम इंडिया सातवें और निर्णायक वन डे में इंग्लैंड के खिलाफ महज 187 रनों पर ऑल आउट हो गई। महेंद्र सिंह धोनी(50) के अतिरिक्त कोई भी भारतीय बल्लेबाज इंग्लैंड की शानदार गेंदबाजी के सामने टिक कर नहीं खेल सका। हालांकि इस हाल के लिए अंपायरों के कुछ खराब निर्णय भी जिम्मेदार रहे।
इससे पहले पिछली लगातार दो जीतों से उत्साहित भारतीय टीम के कप्तान राहुल द्रविड़ ने लॉर्डस के इतिहास को नजरंदाज करते हुए पहले बल् लेबाजी का निर्णय लिया। उल्लेखनीय है कि क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले इस मैदान में अक्सर टॉस जीतने वाला कप्तान क्षेत्ररक्षण पसंद करता है। इसकी वजह सुबह का मौसम गेंदबाजों के लिए मददगार होना है।
किसी भी साझेदारी का लंबा न खिंच पाने से भारत की समस्या और बढ़ीं। इस सीरीज में तीन शतकीय साझेदारी करने वाली सचिन(30) और सौरव(15) की जोड़ी सिर्फ 29 पर ही टूट गई। इसके बाद गौतम गंभीर(10) क्रिज पर पैर जमाने के बाद एक एक गलत शॉट खेलकर आउट हुए। उनके बाद कप्तान द्रविड़ (0) और सचिन के पाक अंपायर अलीम दर के आउट करार दिए जाने के बाद भारतीय बल्लेबाजी की कमर ही टूट गई। रॉबिन उथप्पा(22) और युवराज सिंह(28) ने पांचवे विकेट के लिए 47 रन जोड़कर भारत को संकट से बाहर निकालने के संकेत दिए, लेकिन उथप्पा के मैस्करहैंस की गेंद पर धर्य खोने के बाद वापसी की संभावनाएं क्षीण हुईं। छठे विकेट के रूप में युवराज के भी मैस्करहैंस के शिकार हो जाने के बाद रही सही उम्मीद भी जाती रही। धोनी की आज प्रशंसा करनी होगी। उन्होंने 119 रनों पर ही छह विकेट गिर जाने के बाद पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ स्कोर में 68 रनों का और इजाफा कर स्थिति को शर्मनाक होने से बचाया।