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Other Sports Other Sports भोपाल/नईदिल्ली
'चक दे इंडिया' की धूम और रेलवे को 20 हजार करोड़ रुपए के सालाना फायदे के बीच देश को हॉकी का विश्व कप दिलाने वाले पांच हॉकी खिलाड़ी अभी तक रेलवे के मुफ्त यात्रा पास की सुविधा से महरूम हैं। इस सुविधा की राह देखते-देखते इनके दो साथी तो फानी दुनिया को अलविदा कह चुके हैं।
1995 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की किसी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल देश के सभी खिलाड़ियों को मुफ्त रेल यात्रा की सुविधा देने की घोषणा की थी। रेलवे ने इस घोषणा पर अमल तो किया, लेकिन हॉकी विश्व कप जीतने वाली टीम के खिलाड़ियों को इस सुविधा की जद में शामिल नहीं किया। इसके चलते 1975 के हॉकी वल्र्डकप में स्वर्ण पदक हासिल करने वाली भारतीय टीम के पांच सदस्य लेजली फर्नाडीज, ब्रिगेडियर एचजेएस चिमिनि, अशोक दीवान, पीई कलैया और ओंकार सिंह को आज तक मुफ्त यात्रा की सुविधा नहीं मिली है। साठ साल से ज्यादा के हो चुके इन पूर्व खिलाड़ियों को इसके लिए अपने स्तर पर काफी प्रयास करने पर भी पर सफलता नहीं मिली। ये सभी कुआलालंपुर में आयोजित विश्व कप हॉकी जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल थे। इस टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को 2-1 से शिकस्त दी थी।
बोम्मई ने भी की थी सिफारिश चेन्नई के एंग्लो-इंडियन सबर्बन फ्रंट ने 1997 में तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री एसआर बोम्मई का ध्यान इस ओर दिलाया। उन्होंने उस समय के रेल मंत्री रामविलास पासवान को पत्र लिखकर इस मांग को जायज ठहराया। उन्होंने विश्व कप हॉकी के स्वर्ण पदक विजेताओं के साथ ही द्रोणाचार्य तथा राजीव गांधी खेलरत्न सम्मान प्राप्त खिलाड़ियों को भी यह सुविधा देने की सिफारिश की।
क्या किया रेलवे ने : इसके बाद विभाग ने द्रोणाचार्य और राजीव गांधी खेलरत्न से सम्मानित खिलाड़ियों को तो मुफ्त यात्रा का पात्र मान लिया, लेकिन विश्व कप हॉकी विजेता टीम के पांच खिलाड़ियों को इससे बाहर ही रखा। दिलचस्प है कि विश्वकप विजेता टीम के नौ खिलाड़ियों-कैप्टन अजीत पाल सिंह, असलम शेर खान, वरिंदर सिंह, माइकल किंडो, वीजे फिलिप, अशोक कुमार, हरचरण सिंह, सुरजीत सिंह, मोहिंदर सिंह आदि को पास जारी किए गए थे। ये खिलाड़ी खुद रेल मंत्रालय के दोतरफा फैसले से हतप्रभ हैं।
गौरतलब है कि 20 हजार करोड़ के लाभ में चल रहा रेल विभाग हर साल मुफ्त यात्रा के पास जारी करता है। इसका लाभ लेने वालों में सबसे अधिक राजनेता या उसकी कमेटियों के सदस्य हैं, लेकिन देश को गौरव दिलाने वाले पांच बुजुर्गे को पास देने में रेलवे को वित्तीय कठिनाई आ रही है। इन खिलाड़ियों के साथ विश्वकप जीतने वाले दो अन्य खिलाड़ी-मोहिंदर सिंह और शिवाजी राव अब इस दुनिया में नहीं रहे।
क्या कहते हैं खिलाड़ी हम लोग पिछले बारह साल से कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला। -लेजली फर्नाडीज, गोलकीपर
इस बारे में तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार और मानव संसाधन विकास मंत्री अजरुन सिंह का भी ध्यान दिलाया,लेकिन किसी ने भी गंभीरता नहीं दिखाई। -ओंकार सिंह,लेफ्ट आफ
मैं खुद समझ नहीं पा रहा कि हम लोगों को लाभ क्यों नहीं मिल पाया। -अशोक दीवान, गोलकीपर
विश्वकप विजेता सभी खिलाड़ियों को मुफ्त रेल पास के साथ अन्य जरूरी सुविधाएं मिलना चाहिए। रेलवे के व्यवहार की मैं भत्र्सना करता हूं। -असलम शेर खान, राइट फुल बैक विश्वकप विजेता भारतीय हॉकी टीम
जिन खिलाड़ियों ने हमें विश्व में गौरव दिलाया उनके लिए रेलवे को सहृदयता दिखाना चाहिए। -जलालउद्दीन ओलिंपियन