जालंधर:
सिटी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर ३-४ पर वीरवार रात करीब साढ़े नौ बजे दो ट्रेने आमने-सामने होने से यात्रियों में दहशत फैल गई, हालांकि कोई दुर्घटना नहीं हुई। उधर, रेलवे प्रबंधन ने मामले को दबाने के लिए कहा कि ट्रैफिक कंट्रोल के लिए ऐसा पहले भी किया जाता है।
यह है मामला
जम्मू से दिल्ली जाने वाली जम्मू मेल(4034) हर रात साढ़े 9 बजे प्लेटफार्म नं. 2 से होकर गुजरती है, लेकिन वीरवार रात कैबिनमैन व असिस्टैंट स्टेशन मास्टर की गलती से ट्रेन को प्लेटफार्म नं. 3-4 पर डाल दिया गया। इसके बाद बठिंडा से जम्मू जाने वाली गाड़ी संख्या 9225 जोकि रोजाना प्लेटफार्म नंबर 3-4 से होकर गुजरती है, उसे भी 3-4 प्लेटफार्म पर डाल दिया गया। दोनों ट्रेनों का समय और ट्रैक भी एक ही था। एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों को आमने-सामने आते देख स्टेशन पर खड़े यात्री घबरा गए और स्टेशन पर दहशत फैल गई लेकिन जब मास्टर को गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने 4034 को आउटर पर ही खड़ा करवा दिया।
ड्राइवर ने आउटर पर रोकी ट्रेन
अनहोनी को टालने के लिए जम्मू से दिल्ली जाने वाली ट्रेन नंबर 4043 के ड्राइवर ने ट्रेन को आउटर पर लगा दी और यह गाड़ी लगभग आधा घंटे आउटर पर ही खड़ी रही और जब ट्रेन नंबर 9225 चली गई तो पायलट के सहारे आउटर से धीरे-धीरे प्लेटफार्म नं. 2 पर गाड़ी को लाया गया।
ट्रेन हुई लेट
जम्मू से दिल्ली जाने वाली ट्रेन नं. 4034 वीरवार रात निर्धारित समय से आधा घंटा लेट हो गई।
क्या है नियम
रेलवे के जानकारों का कहना है कि एक ट्रैक पर एक समय में दो ट्रेनों को कभी नहीं लाया जा सकता है। दोनों में से एक ट्रेन को पहले आउटर पर खड़ी करनी पड़ेगी और जब ट्रैक खाली हो जाएगा तो दूसरी को ट्रैक पर लाया जाएगा।
सवाल
अब सवाल यह उठता है कि रोजाना प्लेटफार्म नं. 2 से होकर जाने वाली ट्रेन नं. 4034 को वीरवार रात उस रूट पर क्यों नहीं डाला गया? अगर 3-4 नंबर प्लेटफार्म पर दोनों ट्रेनें नईं आईं तो जम्मू से दिल्ली जाने वाली ट्रेन को आउटर पर आधा घंटा क्यों खड़ा किया गया? अगर दोनों ट्रेनें आमने-सामने हुईं तो किसकी गलती है? कौन है जिम्मेदार?
क्या कहते हैं कैबिनमैन
सिटी रेलवे स्टेशन के कैबिनमैन का कहना है कि प्लेटफार्म नं. 2 पर ट्रेन नंबर 8102 टाटामूरी खड़ी थी, जो प्लेटफार्म 2 पर रात 9 बजकर 13 मिनट पर आई और 9 बजकर 21 मिनट पर रवाना हो गई। इसके बाद ट्रेन नं. 4034 जोकि आधे घंटे से आउटर पर खड़ी थी, उसे पायलट के सहारे प्लेटफार्म नंबर 2 पर लाया गया।
* प्लेटफार्म नं. 3 व 4 का ट्रैक एक ही है। दोनों ट्रैक में से किसी एक पर ट्रेन होती है तो दूसरी ट्रेन को इसके साथ वाले ट्रैक से निकाल दिया जाता है, जो आगे जाकर फिर अपने रूट पर हो जाती है।
- बलदेव सिंह, एरिया ट्रैफिक मैनेजर।