जयपुर: मकराना में सरकार की ओर से दोहरी रॉयल्टी वसूले जाने और खान मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे के रवैए से नाराज मकराना से भाजपा विधायक भंवरलाल राजपुरोहित ने इस्तीफे की धमकी दी है। उनका कहना है कि सरकार वादे के बावजूद मकराना के लोगों के साथ अन्याय कर रही है। राजपुरोहित ने शुक्रवार शाम मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी अपनी नाराजगी बता दी।
राजपुरोहित ने कहा कि वे 20 साल तक प्रधान रहे हैं। उन्हें किसी पद की कोई लिप्सा नहीं है। उनके लिए तो मकराना का हित सर्वोपरि है। राजपुरोहित ने कहा कि वे मकराना के व्यवसायियों को न्याय दिलाकर रहेंगे, भले ही इसके लिए कोई भी कदम क्यों न उठाना पड़े। जब खान मंत्री ने पहले आश्वासन दिया, वे अब इसे पूरा क्यों नहीं कर रहे?
राजपुरोहित ने सवाल किया कि क्या मकराना राजस्थान का हिस्सा नहीं है? अगर मकराना राजस्थान का ही हिस्सा है तो फिर वहां के मार्बल व्यवसायियों से दोहरी रॉयल्टी क्यों वसूल की जा रही है? यह रॉयल्टी खनन पर भी वसूली जाती है और माल पर भी। जबकि किशनगढ़ और आबू रोड में एक ही रॉयल्टी वसूल की जाती है। यह मकराना के साथ अन्याय है।
राजपुरोहित का कहना है कि वे खुद इस मामले में मुख्यमंत्री और खान मंत्री से कई बार मिल चुके हैं। इस पर छह माह पहले एक समिति गठित की गई थी, लेकिन उसका नतीजा अभी तक नहीं निकला। राजपुरोहित का कहना है कि गुरुवार को जो नई रॉयल्टी दरें तय की हैं, वे भी मकराना के लिए सही नहीं हैं।
* राजपुरोहित की मांग के अनुरूप समिति गठित की गई थी। समिति में सदस्य भी उनकी पसंद के ही थे। समिति की रिपोर्ट वित्त विभाग को चली गई। अब अगर वित्त विभाग नहीं मानता तो मैं क्या करूं? मामला तो राजपुरोहित और वित्त विभाग के बीच का है। इसमें मैं कहां से आ गया?
—लक्ष्मीनारायण दवे, खान मंत्री
क्या कहते हैं व्यापारी
* यह सब झगड़ा वित्त विभाग का है। मकराना में बाहर का पत्थर भी कटता है। इसकी रॉयल्टी के विवाद को एक समिति ने हल करने की कोशिश की थी, लेकिन वित्त विभाग ने अड़ंगा लगा दिया।
—महेंद्र जैन, सचिव, मार्बल मचेर्ँट्स एसोसिएशन
* मकराना मंडी में मार्बल स्लैब पर रॉयल्टी वसूली जाती है। सरकार ने इसे 300 रुपए से 400 रुपए प्रति टन कर दिया है। अन्य मंडियों में 200 रुपए प्रति टन रॉयल्टी वसूली जाती है।
—जाकिर हुसैन जेसावत, अध्यक्ष, संगमरमर व्यापार मंडल
संघर्ष करेंगे व्यापारी
जयपुर. खान मंत्री की ओर से रॉयल्टी की दरों में अब कोई फेरबदल नहीं करने के फैसले से पांच जिलों के खनन व्यापारियों में आक्रोश बढ़ गया है। संयुक्त संघर्ष समिति ने आखिरी दम तक प्रयास व आंदोलन करने का निर्णय लिया है। पूरे राज्य में रॉयल्टी की दरें एक समान करने की मांग को लेकर खनन कार्य से जुड़े व्यवसायियों ने पांच जिलों जयपुर, अलवर, भरतपुर, सीकर व झुंझुनूं में कामकाज ठप व आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। संयुक्त संघर्ष समिति का आंदोलन शुक्रवार को भी जारी रहा। समिति ने कलेक्ट्रेट पर धरना दिया।
दरें और कम नहीं होंगी
खान मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे ने रॉयल्टी में किसी तरह के संशोधन से इनकार किया है। पांच जिलों के साथ सौतेले व्यवहार पर उनका कहना है कि इन जिलों से खनिज हरियाणा व दिल्ली जाते हैं। पड़ौसी राज्यों में रॉयल्टी व बजरी, रोडी, पत्थर आदि की दरें बहुत ज्यादा हैं।
* पांच जिलों को अलग से बांटना गलत है। आखिरी दम तक आंदोलन जारी रखेंगे। शनिवार को मुख्यमंत्री से मिलेंगे।
—जयनारायण मोदी, अध्यक्ष, संयुक्त संघर्ष समिति
प्रभावित जिलों के खनन कार्य से जुड़े व्यवसायियों व संषर्ष समिति की तीज होटल में बैठक हुई। बैठक में पांच जिलों में बजरी, ग्रिट व चिनाई पत्थर की रॉयल्टी दरें 16 रुपए एवं अन्य जिलों में 10 रुपए निर्धारित करने का विरोध किया गया। साथ ही पांचों प्रभावित जिलों के व्यवसायियों को संघर्ष समिति ने समर्थन देने का निर्णय लिया। समिति के संयोजक राजेंद्र जरेठी ने बताया कि बैठक में क्रेशर यूनियन, बजरी यूनियन, हॉफ बॉडी ट्रक ऑपरेटर्स सहित अन्य संगठनों के पदाधिकारी मौजूद थे।