Manoranjan
Cinema
Bollywood Bollywood परदे के पीछे
हिंदुस्तान की तरह सिनेमा उद्योग में भी साधन-संपन्न इंडिया और साधनहीन भारत है। धन कमाने की होड़ में इश्क पिछड़ जाता है। सहूलियत की नींव पर खड़े रिश्ते आर्थिक समीकरण बदलने और जरूरत का तराजू झुकने पर ढह जाते हैं। बिपाशा बसु और जॉन अब्राहम के रिश्ते के प्याले में तूफान आ चुका है।
इधर करीना और शाहिद कपूर के अलगाव की अफवाहें भी जोर पर हैं। कहा जा रहा है कि सैफ अली खान की पूर्व अंतरंग मित्र रोजा ने यह कहते हुए शाहिद के कान भरे हैं कि सैफ और करीना के बीच कुछ पक रहा है, क्योंकि दोनों विगत दो माह से लद्दाख, जैसलमेर और केरल में शूटिंग कर रहे हैं। उधर शाहिद कनाडा में अजीज मिर्जा की फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं। क्या यह भौगोलिक दूरियां दिलों को भी दूर कर सकती हैं? इसी कॉलम में पहले भी लिखा जा चुका है कि करीना ने शाहिद की खातिर मांस खाना छोड़ दिया है और किसी भी कपूर कन्या के लिए यह त्याग जरा बड़ी बात है।
खान-पान और स्वभाव के जुदा होने पर भी प्यार कायम रह सकता है, क्योंकि प्यार संकीर्ण दायरा नहीं है जो स्वतंत्र व्यक्तित्व को पनपने न दे। खान-पान और स्वभाव को एक जैसा बनाना अस्वाभाविक है और प्यार को इस ढोंग की क्या दरकार है। सारे ढोंग और दिखावे से मुक्त स्वतंत्र व्यक्तित्व विकास ही प्रेम का ध्येय होना चाहिए। व्यक्तित्व एक-दूसरे में विलीन नहीं होते, क्योंकि वे तरल नहीं वरन जटिल हैं और जटिलताओं के परे स्वयं की खोज ही असली उद्देश्य होना चाहिए। यह भी सुना जा रहा है कि शाहिद और करीना सिद्धिविनायक कंपनी द्वारा निर्मित 'जब वी मेट' के प्रदर्शन के बाद ही अलगाव की घोषणा करेंगे ताकि बॉक्स ऑफिस प्रभावित न हो, जबकि हकीकत यह है कि इन दोनों का इश्क हो या अलगाव, दर्शक को कोई फर्क नहीं पड़ता।
मेहबूब खान ने सुनील दत्त और नरगिस से कहा था कि वे अपने विवाह को गुप्त रखें, क्योंकि 'मदर इंडिया' में वे दोनों माता और पुत्र की भूमिकाओं में हैं। यह वजह जायज थी, क्योंकि परदे पर और यथार्थ में रिश्तों का यह उलटफेर एक गाली में बदल सकता था। सुनील दत्त और नरगिस की हैसियत के सामने शाहिद और करीना एक कहावत याद दिलाते हैं-'क्या पिद्दी और क्या पिद्दी का शोरबा।'
करीना खूबसूरत और प्रतिभाशाली हैं, परंतु उन्होंने अभी तक कोई भव्य सफल फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका नहीं की है। 'रिफ्यूजी' से 'ओमकारा' तक व्यावसायिक रूप से असफल फिल्मों में ही काम किया है। इस तथ्य के बावजूद वह शिखर दल में गिनी जाती हैं, क्योंकि वह संभावना का भाव पैदा करती हैं। अपनी दूसरी ही फिल्म शाहरुख की 'अशोका' में अंग प्रदर्शन करने की भूल उनसे हुई है। उनका शरीर दर्शकों के लिए रहस्यमय नहीं है। वैजयंतीमाला से लेकर माधुरी और काजोल तक सारी शिखर नायिकाओं ने शरीर प्रदर्शन में किफायत बरती है।
इसी तरह फिल्म 'विवाह' शाहिद की भी एकमात्र भव्य सफलता है और 'विवाह' के बाद उसे करीना की बैसाखी की आवश्यकता नहीं है। दरअसल वह आकलन में गलती कर रहे हैं, क्योंकि 'विवाह' का सारा श्रेय केवल सूरज बड़जात्या को जाता है। अपनी असफलताओं की समानता भी शायद इन्हें जोड़ रही है। बहरहाल इसकी संभावना कम ही है कि करीना सैफ की ओर आकर्षित हुई होंगी, क्योंकि दोनों की उम्र में अंतर है और सैफ-अमृता के बच्चे करीना से थोड़े ही छोटे हैं। अत: वह बहुत यंग स्टेप मदर की भूमिका में जंचेगी नहीं।
सैफ और करीना 'ओमकारा' में साथ काम कर चुके हैं और 'टशन' उनकी दूसरी फिल्म है। सैफ ने कुछ एकल सफलताएं अर्जित की हैं, परंतु आज भी वह ऐसे सितारे नहीं हैं जो पहले दिन अपने दम पर हाउसफुल करा लें। बहरहाल इश्क अंधा होता है और शायद बहरा भी। अजीबो-गरीब लोकेशन पर लंबे समय तक साथ-साथ काम करने से आकर्षण का पैदा होना प्रेम नहीं, तन्हाई की वजह से भी ऐसा हो सकता है।