बीकानेर: राज्य की मुख्यमंत्री के महिला होने का लाभ लगता है नव नियुक्त हिन्दी की महिला व्याख्याताओं को मिल गया है। हिन्दी की 59 महिला व्याख्याताओं को उनके गृह जिलों में लगाकर राहत दी गई है। राजस्थान लोक सेवा आयोग के तहत करीब तीन सौ हिन्दी व्याख्याताओं का चयन हुआ था तथा सभी को नियुक्तियां भी दे दी गईं।इन व्याख्याताओं में 68 महिलाओं को गृह जिले से दूरस्थ स्थानों पर लगा दिया गया था। इनमें से अधिकांश महिलाओं को डार्क जोन वाले जिले मिले, जहां से तबादलों पर प्रतिबंध लगा हुआ है।
महिला व्याख्याताओं ने गृह जिले में ही पदस्थापन्न की मांग की थी। कुछ महिलाओं को पूर्व में ही गृह जिलों में पदस्थापित कर दिया गया था। 59 महिलाओं के संबंध में शिक्षा आयुक्त ने राज्य सरकार से स्वीकृति मांगी थी। सरकार से मंजूरी मिलने पर माध्यमिक शिक्षा आयुक्तालय ने इन महिलाओं को गृह जिले में लगाने के आदेश जारी किए हैं।
गौरतलब है कि हिन्दी व्याख्याताओं के पदस्थापन्न के प्रस्ताव माध्यमिक शिक्षा आयुक्तालय ने पूर्व में तैयार किए थे लेकिन उन्हें मंजूरी नहीं मिली। राज्य सरकार के निर्देश पर पदस्थापन्न जयपुर से किए गए। कार्यग्रहण करने के बाद महिलाओं को तो राहत मिल गई लेकिन पुरुष व्याख्याताओं को डार्क जोन में ही नौकरी करनी पड़ रही है।
हैडमास्टरों के संशोधन
पातेय वेतन पर लगाए गए हैडमास्टरों के आदेशों में संशोधन किए गए हैं। राज्य में पातेय वेतन पर 805 हैडमास्टर लगाए गए थे। इनमें 76 ऐसे थे, जिनके नाम, पते गलत हो गए या कुछ स्थानों पर दो जनों का पदस्थापन्न कर दिया गया। माध्यमिक शिक्षा आयुक्तालय ने इन प्रकरणों में संशोधन कर दिया है।