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आर्म्स लाइसेंस को लगी लगाम

जोधपुर: श्रीगंगानगर में आर्म्स हथियारों के लाइसेंस जारी करने में बड़े स्तर पर गड़बड़झाला सामने आने के बाद राज्य सरकार के गृह विभाग में ऐसा हड़कंप मचा है कि पिछले तीन महीनों से लगातार जिला कलेक्टरों को सतर्कता बरतने और अब तक के मामलों की तहकीकात करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

श्रीगंगानगर जिले में हथियारों के फर्जी लाइसेंस जारी करने में ऊपर से नीचे तक अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत उजागर होने के बाद गृह विभाग ने सबसे पहले तहसीलदारों के अधिकार छीन लिए हैं। कलेक्टरों को लगातार कई बिंदुओं पर जांच करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

तहसीलदार नहीं दे सकेंगे टोपीदार का लाइसेंस
गृह विभाग ने तहसीलदरों से टोपीदार बंदूक का लाइसेंस देने या उसे नवीनीकृत करने का अधिकार छीन लिया है। विभाग ने 30 दिसंबर 1989 को जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, श्री गंगानगर व हनुमानगढ़ जिलों को छोड़कर सभी जिलों के तहसीलदारों को टोपीदार बंदूकों के लाइसेंस जारी करने या उन्हें नवीनीकृत करने के अधिकार दिए थे। बाद में 22 सितंबर 1998 को बचे हुए पांच जिलों के तहसीलदारों को भी आयुध नियम-1962 के तहत यह अधिकार दिए गए थे।

श्रीगंगानगर में टोपीदार बंदूक के लाइसेंस के आधार पर आर्म्स लाइसेंस जारी करने का खेल बेनकाब होने के बाद गृह विभाग के उप सचिव आरके पारीक ने एक अधिसूचना जारी करते हुए तहसीलदारों के अधिकार छीन लिए हैं।





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