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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर: पीएससी के पूर्व सचिव संजय ओझा गुरुवार को एंटी करप्शन ब्यूरो के समक्ष पेश हुए। एसीबी ने उनसे पीएससी 2003 परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की विस्तृत जानकारी ली। पूछताछ करीब पांच घंटे चली। श्री ओझा आईएफएस हैं और वर्तमान में केंद्र में प्रतिनियक्ति हैं।
बताया गया कि वे चंद महीनों के लिए ही पीएससी थे। उनके कार्यकाल में पीएससी में न तो कोई परीक्षा हुई और न ही नतीजे जारी हुए थे। सूत्रों के अनुसार कुछ अफसरों ने बयान में श्री ओझा का नाम लिया इसलिए उनसे पूछताछ अपरिहार्य थी। गौरतलब है, ब्यूरो से वर्षा डोंगरे सहित कुछ उम्मीदवारों ने गड़बड़ियों की शिकायत की थी।
उन्होंने पीएससी अफसरों पर स्कैलिंग में गड़बड़ी कर पात्र उम्मीदवारों को चयन से बाहर करने का आरोप लगाया है। ब्यूरो ने दो माह पूर्व प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। उसने सामान्य प्रशासन विभाग से नियुक्तियों को निरस्त कर नतीजों का फिर से पुनरीक्षण करने का अनुरोध किया है। रिपोर्ट में चयनित दो दर्जन से अधिक उम्मीदवारों के चयन में गड़बड़ी का उल्लेख है।
मामला हाईकोर्ट में लंबित होने की वजह से शासन किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं कर पा रही है। हाईकोर्ट में भी मामले की सुनवाई अंतिम दौर में थी लेकिन चयनित उम्मीदवारों ने प्रभावित होने की आशंका से याचिका लगा दी है कि अदालत उनका पक्ष भी सुने, इसलिए मामला कुछ दिन और टल गया है। पीएससी के अनुभाग अधिकारी के खिलाफ भी पीएससी गड़बड़ियों की जांच कर रही है।
ब्यूरो पीएससी के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों का भी बयान लेगा। इसके लिए सचिव प्रदीप पंत, परीक्षा नियंत्रक रीता शांडिल्य, पूर्व सचिव मनोहर पांडे व पूर्व परीक्षा नियंत्रक डा. बीपी कश्यप व अन्य पदाधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें ब्यूरो ने बयान के लिए बुलाया है।