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पायलट बनने की चाहत को पंख नहीं

जालंधरplying club in punjab केंद्र की फ्री स्काई पॉलिसी के बाद सिविल एविएशन इंडस्ट्री में आए बूम को पंजाब सरकार अपने उन युवाओं के लिए भुना नहीं पा रही है जो पायलट बनने की तमन्ना रखते हैं। ऐसे लाखों युवा हैं जो सरकार के ढीलेपन की वजह से यह व्यवसाय अपनाने से वंचित हैं। देश में आए दिन नई एयरलाइंस अपने ऑपरेशन शुरू करने की घोषणा कर रही हैं। उन्हें पायलटों की जरूरत है, लेकिन बदकिस्मती से राज्य में पायलट ही तैयार नहीं हो पा रहे हैं।

मजबूरी में पंजाब छोड़ते युवा: पंजाब में ट्रेनिंग की उपयुक्त व्यवस्था नहीं होने की वजह से पायलट बनने के शौकीन युवाओं मजबूरी में दक्षिण की ओर या फिर विदेशों का रुख कर रहे हैं, जहां कम समय में अल्ट्रा-मॉडर्न जहाजों पर ट्रेनिंग कराई जा रही है।

बाहर वालों के भरोसे:

एविएशन के क्षेत्र में फस्र्ट ऑफिसर यानी को-पायलट के स्तर पर ही नौकरी की शुरुआत में 50 हजार से लेकर 1.20 लाख रुपए प्रति माह वेतन मिलता है। कमांडर यानी पायलट तो 1.5 लाख से लेकर 4 लाख रुपए प्रति माह तक का वेतन पा रहे हैं। जहाजों की निरंतर बढ़ रही संख्या के अनुरूप देश में पायलट ही नहीं मिल रहे हैं।

बहुत सारी एयरलाइंस में विदेशी पायलट ही विमान उड़ा रहे हैं। बेहतर ट्रेनिंग सुविधाएं होने पर यह मौका देश के युवाओं के साथ-साथ पंजाब के युवाओं को मिल सकता है।

व्यवसाय में नौकरी के मौके भारतीय घरेलू आकाश पर इंडियन, किंगफिशर, जैट एयरवेज, जैटलाइट, स्पाइसजैट, एमडीएलआर, इंडिगो, गो एयर, जैगसन, पैरामाउंट जैसी अनेक एयरलाइन्स हैं जो देश के विभिन्न हिस्सों में रोजाना हजारों उड़ानें संचालित कर रही हैं। इनमें से कुछ अंतरराष्ट्रीय रूटों पर भी अपनी सेवाएं दे रही हैं और लगातार विस्तार में जुटी हैं। रूट सैक्टर बढ़ रहे हैं तो जहाजों की संख्या भी बढ़ रही है। इसके साथ ही पायलटों की जरूरत में भी इजाफा हो रहा है। इन एयरलाइंस के अलावा देश के औद्योगिक घराने निजी जहाज खरीदने में जुटे हैं।

सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टिसिपेशन के आधार पर नए संस्थान शुरू करने की कवायद में है। अगर वायुसेना से अनुमति मिल गई तो तलवंडी साबो के नजदीक एक नया संस्थान स्थापित किया जा सकेगा। —गगनदीप सिंह बराड़, एडिशनल प्रिंसिपल सैक्रेटरी-कम-डायरेक्टर, सिविल एविएशन, पंजाब





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