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रुकिए, आपका मकान इस लिस्ट में तो नहीं!

जयपुर:home राज्य मंत्रिमंडल के फैसले के बावजूद कृषि भूमि पर बसी कालोनियों में सैकड़ों मकानों का नियमन नहीं हो पाएगा। प्रदेश में 75 फीसदी तक आवासीय निर्माण वाली करीब 750 कालोनियों के नियमन के लिए स्वायत्त शासन विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं। इनमें सड़कों की न्यूनतम चौड़ाई तय करने के साथ ही सरकारी और सुविधा क्षेत्र में बने निर्माणों का नियमन नहीं करने की शर्त जोड़ दी गई है।

सोसायटियों की कालोनियों में सड़कों की चौड़ाई भी 20 और 25 फीट से ज्यादा नहीं है, जबकि जयपुर, कोटा, जोधपुर नगर निगम, सभी नगर सुधार न्यास और प्रथम श्रेणी की नगर पालिका क्षेत्रों की कालोनियों के लिए आंतरिक सड़कों की न्यूनतम चौड़ाई 30 फीट तय की गई है। द्वितीय श्रेणी की नगर पालिका क्षेत्रों में कालोनियों की आंतरिक सड़कों की चौड़ाई 25 और तृतीय तथा चतुर्थ श्रेणी की नगरपालिका क्षेत्रों की कालोनियों में आंतरिक सड़कों की चौड़ाई कम से कम 20 फुट तय की गई है।

गृह निर्माण सहकारी समितियों के पदाधिकारियों का कहना है कि समितियों ने नक्शे में भले ही सड़कों की चौड़ाई 30 और 40 फीट दिखा रखी हो, लेकिन मौके पर स्थिति इसके विपरीत है। वास्तविकता यह है कि जहां 75 फीसदी आवासीय निर्माण हो चुका है, उन कालोनियों में सड़कों की चौड़ाई 20 और 25 फीट से ज्यादा नहीं हो सकती। यदि सड़कों की चौड़ाई 30 फीट रखें तो निर्मित क्षेत्रफल 75 फीसदी हो ही नहीं सकता।

सुविधा क्षेत्र और सरकारी जमीन भी होगी बाधा : राज्य सरकार ने कृषि भूमि पर बसी कालोनियों में सरकारी जमीन और सुविधा क्षेत्र में बने मकानों का नियमन करने से साफ इनकार कर दिया है। गृह निर्माण सहकारी समितियों की योजनाओं में पार्क, सामुदायिक भवन सहित सुविधा क्षेत्र में भूखंड बेचने की शिकायतें सर्वाधिक हैं। कई सोसायटियों ने तो कालोनी के आसपास या बीच में आ रही सरकारी जमीन को भी बेच दिया है। इस तरह के मामलों में सरकार ने संबंधित स्थानीय निकायों को पुलिस में मामले दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

प्रक्रिया में एकरूपता बनाई जाएगी : पंवार
* पूरे राज्य की नियमन प्रक्रिया में एकरूपता लाने के उद्देश्य से नियमन मामले में सरकार की पूर्वानुमति की शर्त जोड़ी गई है। पुराने निर्माण के संबंध में सबूत मांगने का उद्देश्य बाद में हुए अवैध निर्माणों को रोकना है।
-परविंदर सिंह पंवार, प्रमुख सचिव, स्वायत्त शासन एवं नगरीय विकास विभाग





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