भोपाल: यदि आप कोई महंगा कुत्ता खरीदने जा रहे हों, तो यह सुनिश्चित कर लें कि उसके शरीर में माइक्रो चिप लगी है। देश में पहली बार 1 अगस्त से ऐसी चिप का प्रयोग शुरू हुआ है, जिससे किसी भी कुत्ते की नस्ल सहित उसके खानदान एवं अन्य जानकारी पल भर में हासिल की जा सकती है। पहले यह चिप विदेशों से आयातित इक्का-दुक्का कुत्तों में ही होती थी।
चेन्नई स्थित कुत्तों की पंजीयन संस्था ‘द केनल क्लब ऑफ इंडिया’ (केसीआई) ने देशभर में इस चिप की व्यवस्था लागू की है। इसका मकसद उन लोगों पर शिकंजा कसना है, जो किसी स्थानीय या घटिया नस्ल के कुत्ते को विदेशी अथवा अच्छी नस्ल का बता कर उसे महंगे दाम पर बेच देते हैं। कुत्ते के शरीर में चिप लग जाने के बाद स्कैनर की मदद से उसके पूर्वजों सहित नस्ल, आयु आदि का पता आसानी से लगाया जा सकेगा।
राजधानी में इस पद्धति को अपनाने की शुरुआत टीनशेड निवासी कमलेश बेंडवाल ने की है। हाल ही में उन्होंने लेब्रोडोर नस्लवाले अपने तीन कुत्तों को यह चिप लगाने चेन्नई भेजा है।
पंजीयन और चिप का खर्चा
केसीआई में कुत्तों का पंजीयन शुल्क 150 रुपए है। माइक्रो चिप के लिए अतिरिक्त 200 रुपए देने पड़ते हैं। साथ ही कुत्ते से संबंधित जानकारी देनी पड़ती है। केसीआई कुत्ते के पंजीयन प्रमाणपत्र के साथ माइक्रो चिप का कैप्सूल भेज देता है।
कैसे काम करती है माइक्रो चिप
केसीआई से कुत्ते के पारिवारिक व शारीरिक संबंधी जानकारियों का डाटा बेस माइक्रो चिप (कैप्सूल) में डालता है। इसे इंजेक्शन के माध्यम से कुत्ते के गले या पैर में लगा दिया जाता है। यह माइक्रो चिप जिंदगीभर कुत्ते के शरीर में रहती है। इसके बाद जब चाहे स्कैन कर उसके विवरण देखे जा सकते हैं।
शहर में विदेशी प्रजातियों के कुत्ते (लगभग)
प्रजाति संख्या
लेब्राडोर 300 से 400
डाबरमेन 50-60
जर्मन शैफर्ड 400-500
बुलडाग 2 से 5
राट विलर 10 से 12
गेटड्रेन 40 से 50
बुल मेस्टिफ 3 से 6
पग 10 से 15
गोल्डन रिट्रिवर 50 से 60
डालमिशियन 40 से 50
बाक्सर 50 से 60
पाइंटर 10 से 15
स्पीड्स 1000 से 1200