भोपाल: निजी व्यावसायिक कालेजों की अंतरिम फीस कालेजों की व्यवस्था के अनुसार तय की जा सकती है। फीस कमेटी इस बारे में सभी कालेजों के द्वारा छात्रों को दी जा रही सुविधाओं का अध्ययन कर रही है। कमेटी द्वारा तय की जा रही अंतरिम फीस भी अलग-अलग ढांचे में दिए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
प्रवेश एवं फीस विनियामक कमेटी के अध्यक्ष द्वारा निजी कालेज संचालकों को फीस के बारे में जल्दी ही फैसला करने का आश्वासन देने के बाद अब कमेटी कार्यालय में फीस तय करने की कवायद शुरू हो गई है। हालांकि अभी इस बारे में कमेटी की कोई बैठक आयोजित नहीं की गई है और कमेटी अध्यक्ष ने भी फीस बढ़ाने के बारे में कोई स्पष्ट बात नहीं कही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार भी कमेटी को अंतिम फीस कालेज के संसाधन और उसकी स्थिति को देखते हुए तय करना है। कमेटी इसी आधार पर फीस तय करने का विचार कर रही है। सूत्र बताते हैं कि कमेटी सभी कालेजों की बैलेंस शीट का अध्ययन करेगी और शिक्षकों के वेतन, छात्रों की सुविधा और शिक्षा के विकास के लिए कालेज प्रबंधन द्वारा किए जा रहे खर्च के अनुसार उसकी फीस तय की जाएगी।
बताया जा रहा है कि कालेजों को खर्च के अनुसार तीन भागों में बांटा जाएगा और हर भाग में आने वाले कालेजों की फीस का ढांचा एक ही रखा जाएगा। इस प्रकार अंतरिम फीस तीन ढांचों में तय की जाएगी।
दे रहे समायोजन का वादा:
सरकार द्वारा फीस बढ़ाने का आश्वासन देने के बावजूद कालेजों में कमेटी द्वारा घोषित की गई अंतरिम फीस नहीं ली जा रही है। ज्यादातर कालेज प्रबंधन 40 हजार रुपए फीस ले रहे हैं, जबकि सरकार ने 23,300 से 31,000 रुपए के बीच फीस लेने को कहा है।
काउंसिलिंग से सीट आवंटित करा कर प्रवेश लेने पहुंचे एक छात्र अंकित मालवीय के पिता ने कालेज प्रबंधन को आवंटन पर्ची पर लिखी फीस ही जमा करवाने को कहा तो उन्हें जवाब दिया गया कि फीस तो 40,000 रुपए ही देनी होगी, फीस अभी तय नहीं हुई है, बाद में कम ज्यादा होने पर समायोजित कर लेंगे। ज्यादातर छात्र कालेज प्रबंधन के द्वारा ली जा रही फीस ही जमा करके प्रवेश ले रहे हैं।
काउंसिलिंग से प्रवेश लेकर आने वाले छात्रों को कालेज प्रबंधन राशि के समायोजन के लिए लिखित में वादा कर रहे हैं। प्रबंधन द्वारा लिख कर दिया जा रहा है कि सरकार द्वारा अंतरिम फीस तय हो जाने पर फीस की राशि का अंतर समायोजित किया जाएगा।
कितना खर्च
एक कालेज में नये आने वाले 240 छात्रों को पढ़ाने के लिए एआईसीटीई के नियमों के अनुसार खर्च करने पर..
>> वर्तमान में मिल रही कुल फीस - 56 लाख
>> शिक्षकों के वेतन पर- लगभग 66 लाख
>> बिजली का बिल- लगभग छह लाख सालाना
>> अगले साल के पाठ्यक्रम के अनुसार कंप्यूटर और साफ्टवेयर पर- बीस लाख रुपए
>> अगले साल इन्हीं छात्रों के लिए अतिरिक्त स्थान- तीस हजार फिट का निर्माण
>> अन्य सुविधाएं और खर्च- लगभग दस लाख रुपए सालाना