नई दिल्ली.
रिजर्व बैंक की कड़ी मुद्रा नीति के कारण बैंकों के लाभ पर असर पड़ा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष यह 20 बेसिस प्वाइंट पर आ गया है। फिक्की के लिए क्रिसिल द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक पिछले साल के लाभ अंतर (कुल लाभ और कुल राजस्व का अनुपात) 1.6 के मुकाबले वित्तीय वर्ष 2007-08 का लाभ अंतर 1.4 हो सकता है।
लाभ अंतर में यह कमी आरबीआई द्वारा कड़े कदम उठाने के कारण देखा जा रहा है। पिछले दो सालों में आरबीआइ्र ने रेपो रेट में 1.75 प्रतिशत की वृद्धि करने के साथ ही कैश रिजर्व रेशियो भी दो प्रतिशत बढ़ा दिया है। इससे बैंकों के कुल संसाधन पर व्यय भी बढ़ गया है।
वर्ष 2006-07 में डिपोजिट कॉस्ट में 60 बेसिस प्वांइट की वृद्धि हुई थी। इसके साथ ही एसएलआर में तीन प्रतिशत की गिरावट भी दर्ज की गई थी ।