HomeNewsHaryanaHisar Hisar

रेलूराम हत्याकांड: 26 नवंबर को होगी फांसी

हिसार: संपत्ति विवाद को लेकर तीन बच्चों सहित आठ लोगों की नृशंस हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसएस लांबा की अदालत ने शनिवार को पूर्व hangविधायक रेलूराम पूनिया की बेटी सोनिया और उसे पति संजीव कुमार को 26 नवंबर को फांसी देने की तारीख मुकर्रर की है।

इस मामले में 31 मई, 2004 को सेशन जज अरविंद कुमार गोयल ने सोनिया व संजीव को फांसी की सजा सुनाई थी लेकिन होईकोर्ट ने 12 अप्रैल, 2005 को फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। बाद में गत 15 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीएन अग्रवाल और जस्टिस पीपी नाओलकर की बेंच ने इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले को पलट कर दोनों की फांसी की सजा बरकरार रखी।

इसके खिलाफ सोनिया व संजीव ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पीटिशन दायर की जिसे गत 23 अगस्त को खारिज कर दिया गया। इसके बाद रेलूराम पूनिया के भाई रामसिंह ने अपने वकील लाल बहादुर की मार्फत गत 1 सितंबर को इस बारे में जिला अदालत में याचिका दायर कर दोनों की फांसी की तारीख मुकर्रर करने की अपील की।

आफिस रिपोर्ट के बाद अदालत ने शनिवार को दोनों को फांसी देने की तारीख 26 नवंबर मुकर्रर करते हुए अंबाला के जेल अधीक्षक को एक दिसंबर को रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। अब इस मामले में दोनों की फांसी का स्थान व समय अंबाला जेल अधीक्षक मुकर्रर करेंगे जो हिसार और अंबाला में से कोई भी हो सकता है।

क्या रहा घटनाक्रम
* 23 अगस्त, 2001 की रात को दिया गया इस हत्याकांड को अंजाम।
* 31 मई, 2004 को सोनिया और संजीव को सुनाई गई फांसी की सजा।
* 12 अप्रैल, 2005 को हाईकोर्ट ने सजा को उम्रकैद में बदला।
* 15 फरवरी, 2007 को सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए दोनों की फांसी की सजा बरकरार रखी।
* 23 अगस्त, 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने सोनिया संजीव की रिव्यू पीटिशन को खारिज किया।
* 1 सितंबर, 2007 को जिला अदालत ने फांसी की तारीख तय करने को याचिका दायर।
* 8 सितंबर, 2007 को अदालत ने 26 नवंबर को फांसी दिए जाने की तारीख मुकर्रर की।

क्या और क्यों हुई घटना
पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया सहित परिवार के आठ सदस्यों की हत्या का यह वाकया 23 अगस्त, 2001 की रात को हुआ गया, जिसका कारण बेशुमार दौलत थी। उकलाना पुलिस ने 24 अगस्त, 2001 को पूर्व विधायक के मुनीम जीत सिंह के बयान पर रेलूराम की बेटी सोनिया और दामाद संजीव के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था, जिसमें पुलिस ने सोनिया की सास, ससुर, देवर व रामफल, राजेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, सतेंद्र व रविंद्र को भी साजिशकर्ता व शरणदाता बनाया।

हिसार के लितानी गांव स्थित फार्म हाउस में हुए इस जघन्य सामूहिक हत्याकांड में रेलूराम (50), उनकी पत्नी कृष्णा (45), पुत्र सुनील (25), पुत्रवधू शकुंतला (23), पौत्र लोकेश (4), पौत्री शिवानी (2) व प्रीति (3 माह) तथा पुत्री प्रियंका उर्फ पम्मा (16) की हत्या की गई थी।

रेलूराम के पास बेशुमार दौलत थी जिसके बंटवारे को लेकर वारिसों में विवाद बढ़ गया। 23 अगस्त, 2001 को सोनिया सहारनपुर से हिसार आई और फिर स्कूल से अपनी बहन पम्मा को साथ लेकर पिता के फार्म हाउस पहुंची। बाद में योजनाबद्ध तरीके से अपराध को अंजाम दिया गया। इस मामले में पुलिस का शक सबसे पहले सोनिया पर था और बाद में संजीव भी संदेह के घेरे में आ गया। दोनों से पूछताछ के बाद रहस्य का पर्दा हट गया।

अब भी बाकी हैं बचाव के रास्ते
सोनिया और संजीव की सजा की तारीख भले ही मुकर्रर कर दी गई हो लेकिन दोनों के पास अभी भी बचाव के दो रास्ते बाकी हैं। संजीव के भाई राजीव ने सहारनपुर से फोन पर बताया कि वे अपने वकीलों से बात करके अब सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर करेंगे। यदि इसमें भी कोई फायदा नहीं मिला तो राष्ट्रपति के समक्ष मर्सी अपील लगाएंगे। उन्होंने कहा कि उनके भाई और भाभी हत्यारे नहीं हो सकते, इसलिए उनको बचाने के लिए वे अंत तक जाएंगे।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: