नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि जघन्य या क्रूर अपराध का कोई आरोपी यह बहाना बनाकर सजा से बच नहीं सकता कि घटना के वक्त वह नशे में धुत था। हालांकि जस्टिस आरवी रवींद्रन और जस्टिस सुदर्शन रेड्डी की बेंच ने यह कहते हुए तिहरे हत्याकांड के मुजरिम एक रिटायर्ड कांस्टेबल की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया कि उसका अपराध आवेश में आकर किया गया था।
क्या मामला था : 16 फरवरी, 2003 को देशराज और चांद सिंह नामक व्यक्ति की बीवियों में हुए झगड़े ने इस कदर खूनी रूप ले लिया कि देशराज ने चांद सिंह की बीवी मंजीत कौर और उसके दो भाइयों- भगवान सिंह और लाल सिंह को गोली से उड़ा दिया। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में देशराज के परिवार के अन्य सदस्यों को तो बरी कर दिया। उसे मौत की सजा सुना दी। हाईकोर्ट ने यह सजा बरकरार रखी। सुप्रीम कोर्ट में देशराज ने सिर्फ मौत की सजा को चुनौती दी थी।