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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर:
लिम्का बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज कराने राज्य शासन ने पुस्तक वाचन दिवस तो मनाया, लेकिन ग्रामीणों में किताब पढ़ने की अरुचि ने इस कार्यक्रम में जैसे पानी ही फेर दिया। समाज के हर वर्ग, उम्र, जाति, लिंग के लोगों के लिए जिले के शहर व ग्रामीण इलाकों में साढ़े सात हजार से भी अधिक वाचन केंद्रों की स्थापना लोगों में किताब पढ़ने के प्रति रुचि जगाने की गई थी। शनिवार को यहां सुबह 8 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक किताबें पढ़ी गईं, लेकिन किताब पढ़ने वाले छात्र व शिक्षक ही थे। ग्रामीणों ने इसमें रुचि नहीं दिखाई।
दैनिक भास्कर ने वाचन दिवस की सफलता का आकलन करने ग्रामीण इलाके के वाचन केंद्रों का निरीक्षण किया। सकरी प्राइमरी व मिडिल स्कूल में स्टाफ रूमों को ही अस्थाई वाचनालय बनाया गया था। यहां शिक्षक-शिक्षिकाओं, जनभागीदारी समिति के सदस्यों व ग्राम पंचायत के पदाधिकारियों के अलावा और कोई मौजूद नहीं था। महज 25 लोग ही वहां पहुंचे, लेकिन उनमें किताब पढ़ने रुचि नहीं थी। वहां कपड़े की तरह लटकाई गई किताबों में से कुछ उन्होंने अपने हाथ में ली फिर उन्हें वापस रख दिया।
इधर शिक्षकों ने उनका नाम रजिस्टर में पाठक की हैसियत से दर्ज कर लिया। कन्या प्राइमरी व मिडिल स्कूल भरनी में तो स्थिति और भी खराब रही। यहां कुछ ग्रामीण किताब पढ़ने पहुंचे। प्रभारी प्रधानपाठक राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि लोगों में किताब पढ़ने रुचि नहीं है। प्राइमरी स्कूल चोरभट्ठी में बच्चे बाहर खेल रहे थे।
मिडिल स्कूल चोरभट्ठी में छात्राओं ने पाठकों का स्वागत करने के लिए स्कूल परिसर में रंगोली सजा रखी थी, लेकिन दोहपर 1 बजे तक वहां एक-दो लोग ही पहुंचे। प्राइमरी स्कूल औधलियापारा गनियारी भी पूरे दिन सूना ही रहा। शिक्षिका नेहा यादव ने बताया कि अभी तक कोई ग्रामीण किताब पढ़ने क्या, क्या हो रहा है, ये जानने भी नहीं आया। गनियारी स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय का वाचन केंद्र बंद था।
हायर सेकेंडरी स्कूल गनियारी में बीईओ व सीईओ का कार्यक्रम होने के कारण स्कूल स्टाफ के अलावा छात्र-छात्राएं उनके स्वागत की तैयारी में व्यस्त दिखीं। कोई खंभे में झंडे लगा रहा था तो कोई बैनर-पोस्टर से दीवारों को सजा रहा था। यहां 3-4 टेबलों पर कुछ किताबें रख दी गई थीं, जिनके पन्ने छात्र-छात्राएं उलट-पलट रही थीं।
हायर सेकेंडरी स्कूल नेवरा में पाठकों के स्वागत व जानकारी के लिए पुस्तक वाचन दिवस का पोस्टर लगाया गया था। कमरे में छात्राएं रामचरितमानस पढ़ रही थीं, लेकिन यहां दर्जनभर ग्रामीण ही किताब पढ़ने पहुंचे। आत्मानंद वाचनालय से स्कूल को किताबें नहीं मिलीं। प्राइमरी स्कूल मोहनभाठा में बच्चे स्कूल के बाहर खेलते रहे, जबकि अंदर एक कमरे में औपचारिक रूप से किताबों को रस्सी से लटका दिया गया था। यहां पोस्टर भी नजर नहीं आया।
गांवों के अलावा ब्लाक मुख्यालय कोटा में भी स्थिति खराब रही। बेलगहना मार्ग पर स्थित प्राइमरी स्कूल गंज में अधिकारियों को दिखाने के लिए सारे इंतजाम किए गए, लेकिन लोगों को बुलाकर किताब पढ़ाने वाचन केंद्र के कर्मचारियों को असफलता हाथ लगी।
इधर प्राइमरी स्कूल अमाली, बिल्लीबंद के अलावा सल्का-नवागांव में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिलीं। कोटा-रतनपुर मार्ग पर स्थित आत्मानंद वाचनालय जोगीपुर में पूरे दिन ताला लटकता रहा, जबकि प्राइमरी व मिडिल स्कूल जोगीपुर में और दिनों से कम बच्चे स्कूल पहुंचे।
ग्रामीण पाठकों की संख्या न के बराबर ही थी। प्रधानपाठक लखनलाल यादव ने बताया कि ग्रामीणों में किताब पढ़ने रुचि नहीं हैं। बुलाने पर भी वे नहीं आते। प्राइमरी स्कूल लारीपारा में भी यही नजारा दिखाई दिया। प्राइमरी स्कूल अमलडीहा (काल्हामार)में 30 बच्चों के साथ पुस्तक वाचन दिवस मना लिया गया, लेकिन यहां पोस्टर में वाचन की जगह वाचनालय दिवस लिख दिया गया था। साक्षरता दिवस में शिक्षकों ने ये गलती की। यहां स्कूल सूना रहा।
नगर पंचायत के अंतर्गत प्राइमरी स्कूल मेंडरापारा भी सुनसान दिखाई दे रहा था। शिक्षक व छात्रों के अलावा वहां कोई नहीं था। शासकीय कालेज रतनपुर में छात्र-छात्राओं की कुछ भीड़ दिखी। छात्र-छात्राएं किताब पढ़ रह थे, लेकिन यहां भी कोई ग्रामीण पाठक नजर नहीं आया। गल्र्स हायर सेकेंडरी स्कूल व ब्वायज हायर सेकेंडरी स्कूल में भी पुस्तक वाचन दिवस की औपचारिकता पूर्ण की गई।
गल्र्स हायर सेकेंडरी स्कूल में छात्राओं को जमीन पर बिठाकर पढ़ाया जा रहा था, जबकि शिक्षक व जनभागीदारी समिति के पदाधिकारी वहां मौजूद थे। इधर ब्वायज स्कूल में प्राचार्य के अलावा दो ही शिक्षक स्कूल में मौजूद थे, जबकि शेष छुट्टी लेकर अपने घर जा चुके थे। छात्रों की संख्या भी न के बराबर थी।
ज्ञान नही, बंटा राशन
शासकीय कन्या उच्चतर शाला गनियारी में ग्रामीणों को राशन बांटा जा रहा था। स्कूल के एक कमरे को छोड़कर सभी बंद रहे। जानकारी के मुताबिक छात्राओं को हायर सेकेंडरी स्कूल गनियारी भेज दिया गया था। ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल सुबह से नहीं खुला है।