गणेश ऐसे देवता हैं, जो त्रिमूर्ति में शामिल न होते हुए भी हिंदू जनमानस के प्रमुख देवता हैं। शिव के पुत्र होने के नाते विष्णु के उपासक उन्हें न भी पूजें तो कोई बात नहीं, लेकिन ऐसा नहीं है। गणेश इतने सार्वभौमिक हो गए हैं कि उन्हें कई जगह तो विष्णु का पुत्र तक मान लिया गया है। कहीं-कहीं तो विष्णु के मंदिरों में गणेश की भी छोटी सी प्रतिमा रहती है।
श्री गणेश के महात्म्य और धर्म में उनके महत्व के बारे में सदियों पुराने टैक्स्ट और पुस्तकों में भी जिक्र मिलता है। भक्तों ने इन्हें स्तोत्रों, आरतियों, वंदनाओं, नामावलियों आदि के रूप में संग्रह किया है। इसी संग्रह के कुछ मोती हम अपने पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।