News
International International इस्लामाबाद. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने 90 मिनट तक चली बातचीत के बाद एयरक्राफ्ट छोड़ दिया और सात साल के निर्वासन के बाद पहली बार पाकिस्तान की धरती पर अपने कदम रखे। प्लेन से निकलते वक्त उनके साथ उनके सैकड़ों समर्थक और पार्टी नेता मौजूद थे।
बताया जाता है कि पाकिस्तानी अफसरों ने शरीफ के सामने या तो कानूनन जेल जाने या फिर निर्वासन मंजूर करने की मांग रखी है। लेकिन शरीफ के साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों के मुताबिक शरीफ ने निर्वासन के मुकाबले पाकिस्तान में ही रहने को तरजीह दी है। इससे पहले प्लेन में ही मीडिया से बातचीत में शरीफ ने पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ किसी समझौते तक न पहुंचने की स्थिति में प्लेन छोड़ने से इनकार कर दिया था। इसके अलावा उन्होंने अपना पासपोर्ट भी अधिकारियों को सौंपने से मना कर दिया था। प्लेन को चारों ओर से पाकिस्तानी कमांडोज ने घेर रखा था।
नवाज का प्लेन जैसे ही इस्लामाबाद एयरपोर्ट पहुंचा, एक वरिष्ठ आर्मी अफसर सीधे प्लेन में पहुंचा। उसके साथ कई अधिकारी भी थे। ये लोग पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन के नेता से विलक्लों पार बात करने के लिए गए थे। इसके बाद बाकी सभी यात्रियों को प्लेन से उतर जाने दिया गया। इम्मीग्रेशन अधिकारियों ने शरीफ से उनका पासपोर्ट मांगा तो उन्होंने उसे देने से इनकार कर दिया। शरीफ के साथ लंदन से ही कुछ पत्रकार भी आए हैं। एक इम्मीग्रेशन अफसर ने शरीफ को उनके साथ आने के िलए कहा, लेकिन शरीफ ने यह कहकर इनकार कर दिया कि उनके साथ उनके समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता और उनका ब्रिटिश वकील भी चलेगा।
शरीफ के साथ यात्रा कर रहे ब्रिटिश हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य लॉर्ड नजीर अहमद ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वे कहीं भी कोई कानून तोड़ रहे हैं। शरीफ सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं और इसमें सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए। शरीफ के साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों के मुताबिक शरीफ ने निर्वासन के मुकाबले पाकिस्तान में ही रहने को तरजीह दी है।