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सम्पादकीय: रंगों के मनोविज्ञान में सफेद रंग को शांति का प्रतीक माना जाता है, लेकिन शनिवार को दिखाए गए वीडियो टेप में सफेद झक कपड़ों और सफेद पगड़ी में सजे ओसामा बिन लादेन ने अमेरिकियों को जो शांति-संदेश दिया है, वह वास्तव में अशांति-संदेश है। 11 सितंबर के हमले की छठी बरसी के अवसर पर जारी इस टेप में लादेन ने अमेरिकियों को इराक में शांति स्थापित करने का फामरूला बताया है।
फामरूला बहुत आसान है कि यदि वे इराक में जारी युद्ध खत्म कर शांति चाहते हैं, तो उन्हें इस्लाम धर्म अपना लेना चाहिए। इस अपीलनुमा धमकी ने अमेरिका को भीतर से डरा दिया है, पर अमेरिकी फौजों से इराक को मुक्त कराने के लिए लड़ रहे संगठनों को भी इससे नुकसान पहुंचा है।
अमेरिका सहित दुनिया के तमाम देशों में बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हें यह लगता रहा है कि इराक पर अमेरिका का हमला अन्यायपूर्ण कार्रवाई थी। ऐसे लोगों की सहज सहानुभूति अमेरिकी फौजों के खिलाफ लड़ रहे इराकियों के प्रति रही है। ऐसे में लादेन के इस टेप से वह सहानुभूति भी जाती रहेगी, क्योंकि टेप से परोक्ष संकेत यह निकलता है कि इराकियों की लड़ाई अल-कायदा लड़ रहा है।
लादेन ने शांति के लिए जो प्रस्ताव रखा है, वह निहायत ही घटिया और दुनिया भर में एक समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला है। इराक को लेकर अपने देश के भीतर ही बड़े विरोध का सामना कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को इस टेप के रूप में अपने बचाव का एक औजार मिल गया है।
लादेन के इस टेप के बहाने वे अपने देशवासियों को डराकर अपने पक्ष में लामबंद कर सकेंगे। उनके बयान में यह बात साफ पढ़ी जा सकती है। लोगों को डराते हुए बुश फरमाते हैं, ‘ओसामा की मौजूदगी उस खतरनाक दुनिया का संकेत है जिसमें हम रहते हैं। इस टेप से स्पष्ट है कि इराक में अभी डटे रहने की जरूरत है।’
ऐसा लगता है जैसे इस टेप के रूप में बुश को इराक में डटे रहने का लाइसेंस मिल गया है। लादेन के टेप की भाषा इतनी भड़काऊ और अमेरिकी स्वाभिमान को ललकारने वाली है कि इराक मुद्दे पर बुश का विरोध करने वाले अमेरिकी भी अब कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। इसी बिंदु पर आकर एक संदेह यह भी पैदा होता है कि इस टेप के पीछे कहीं कोई साजिश तो नहीं। बहरहाल, टेप असली हो या नकली, इसका फायदा तो बुश को ही मिलना है।