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इंदौर: सोमवार इस रोड के लिए सबसे व्यस्त दिन था। दिनभर में पचास हजार से ज्यादा लोग उज्जैन के लिए रवाना हुए। खराब सड़कों ने महाकाल की शाही सवारी में जा रहे भक्तों की परीक्षा ली। कुछ भक्तों की सवारी तो देवास के रास्ते पहुंच गई और ज्यादातर की इंदौर के मरीमाता चौराहा से लेकर उज्जैन के नानाखेड़ा बस स्टैंड तक हिचकोले खाती रही।
इस बीच बाणगंगा थाने से कुछ आगे लगे जाम में भी बहुत से लोग फंसे। जाम दोपहर से रात तक चलता रहा। सरकारी तंत्र हमेशा की तरह संवेदनहीन ही रहा। उसके पास सड़कों के गड्ढे न भरे जाने के बहुत से कारण गिनाने के लिए थे।
उज्जैन रोड का शहरी हिस्सा भी नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के बीच की खींचतान से प्रभावित रहता है। नगर निगम मरीमाता चौराहा से इंडो-जर्मन टूल रूम तक संपत्तिकर वसूलता है लेकिन सड़क बनाने या सुधारने की बात आए तो जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग की।
सड़क का जिम्मा कागजों पर विभाग के पास ही है लेकिन वह बरसात के कारण पैचवर्क नहीं कर पा रहा है। इधर, सिटी बस देखने आए रायपुर के मेहमानों को भी प्रशासन ने देवास के रास्ते उज्जैन भेजा। विरोध उभरा- सांवेर रोड औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष हरि अग्रवाल ने बताया खराब सड़क के कारण रोज वाहन फंस जाते हैं।
सोमवार को बाणगंगा थाने से कुछ आगे एक ट्रॉला, एक ट्रक और एक रिक्शा गड्ढे में फंस गए। चार-चार घंटे तक जाम लगा रहता है। इसी रोड पर रहने वाले वार्ड-5 के पार्षद के.के. यादव ने बताया मंगलवार को महापौर और कलेक्टर से मिलकर शहरी हिस्सा तत्काल दुरुस्त करने की मांग करेंगे। तीन दिन में नहीं हुआ तो सांवेर रोड औद्योगिक संगठन के साथ मिलकर चक्काजाम करेंगे।
चार दिन में खुलेंगे टेंडर
>> इंदौर-उज्जैन रोड के पैचवर्क के लिए टेंडर निकाल दिए हैं। चार दिन में खुल जाएंगे। अब मौसम भी साफ है। पैचवर्क डामर का ही होगा। वैसे अब यह रोड डेवलपमेंट कॉपरेरेशन के अधीन आ गई है।
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पूनम अग्रवाल, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी