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जालंधर/अमृतसर इस साल का लक्की नंबर 7, एशिया कप भी 7वां था। भारतीय हॉकी के लिए लक्की रहा 7। अगर यह अंक किसी को सबसे ज्यादा रास आया तो वह है प्रभजोत सिंह जिन्होंने एशिया कप के दौरान 15 गोल दागने विपक्षी टीमों अपनी स्टीक तले रौंद डाला। गोल मैन जब अपनी धरती लौटे तो अमृतसर एयरपोर्ट पर गबरुओं ने उनका जबरदस्त स्वागत किया। फूल-मालाओं के साथ जब प्रभजोत ने भंगड़ा डाला तो स्टूडैंट्स भी झूम उठे। अमृतसर के स्प्रिंग डेल सीनियर स्कूल में बात करते हुए प्रभजोत ने बताया अब अगला लक्ष्य जर्मनी हॉकी लीग में अपने स्टीक का जादू बरकरार रखकर के दौरान भी उन्हें काफी कुछ सीखने का मौका मिलेगा।
गलतियों से आदमी सीखता है इस बात को सच साबित करने वाले प्रभजोत ने बताया पिछले मैचों में से सीख ली है। अजलान शाह और चैंपियन चैलेंज टूर्नामेंट के दौरान कुछ मिसटेक्स कीं थी, इस बार उन्हें नहीं दोहराया और एशिया कप जीत लिया। किसी खिलाड़ी को आदर्श मानने संबंधी सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि वह किसी को अपना आदर्श नहीं मानते हैं। बस हॉकी के प्रति समर्पण की भावना और एस्ट्रोटर्फ पर की गई मेहनत से उन्हें यह मुकाम हासिल हुआ है। उन्होंने बताया कि करीब एक साल बाद वह इस फार्म में आए हैं और आगे भी इसे जारी रखेंगे।