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फिर लौटेगा भारतीय हॉकी का गौरव

अभिमत: एशिया कप की जीत ने भारतीय हॉकी टीम के लिए ओलिंपिक और विश्वकप के लिए ठोस बुनियाद रखी है। हमारे खिलाड़ियों ने बेहतरीन टीम स्पिरिट का परिचय दिया है। खेल के मैदान में वे पहले ही मिनट से जीतने के लिए खेलते दिखे।

आमतौर पर यह माना जाता रहा है कि भारतीय टीम रक्षात्मक खेलती है, एशिया कप में खिलाड़ियों ने इस धारणा को बदल दिया। तेज और आक्रामक खेल खेला और उसके परिणाम मिले।

हर गोल के लिए एक हजार रुपए के इंसेंटिव देने की घोषणा ने भी निश्चित ही अपना असर दिखाया है। पूरे टूर्नामेंट में टीम ने 57 गोल किए हैं यानी कि वह 57 हजार रुपए के इंसेंटिव की हकदार बनी। यह रकम आगे और बढ़ाई जाएगी।

रही बात गोल खाने के लिए जुर्माने की, तो अब यह विचार स्थगित कर दिया गया है। अब कोई जुर्माना नहीं लगेगा। मेरा मानना यह था कि जुर्माने का मनोवैज्ञानिक असर पड़ेगा। अब देखिए बलजीत सिंह ने कैसे गोल रोके और वह मैन ऑफ द मैच रहा।

निस्संदेह हमारा लक्ष्य ओलिंपिक और विश्वकप है। इसी महीने जर्मनी में कैंप लग रहा है। दरअसल अब हॉकी की भारतीय तकनीक के सहारे हम आगे नहीं बढ़ सकते। हमें हॉकी की जर्मन और डच स्टाइल अपनानी होगी, हमारा इसी बात पर ज्यादा जोर है। जर्मनी से लौटने के बाद बेंगलूर में कैंप लगाएंगे। सामने चैंपियन ट्रॉफी है। खिलाड़ियों के हौसले काफी बुलंद हैं।

मुझे यकीन है कि वे एशिया कप का प्रदर्शन फिर दोहराएंगे। हमारी टीम के कोच जोक्विम कारवाल्हो को भी काफी कुछ हद तक श्रेय जाता है। टीम में अनुशासन और वक्त की पाबंदी अब देखी जा सकती है। कोच और खिलाड़ियों से मेरा सतत संवाद बना रहता है। हमारे बच्चे हॉकी के पुराने गौरव को फिर से वापस लाएं यही मेरी दिली तमन्ना है।

-केपीएस गिल इंडियन हॉकी फेडरेशन के अध्यक्ष हैं।





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arun sahu
Friday, 21st Sep 2007, 16:51
chake da india, i hope india can win a world cup in hockey as hockey is our national game we should respect our nation.