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मरीज बोले- क्या स्प्रिट पी लें?

इंदौर: एमवाय अस्पताल में रविवार देर रात फायर ब्रिगेड बुलवाकर पानी का इंतजाम तो कर दिया गया लेकिन सोमवार को फिर मरीजों, डॉक्टरों व परिजन को पानी के लिए तरसना पड़ा। सुबह से शुरू हुई ओपीडी में डॉक्टर तो समय से आए और आधे दिन की छुट्टी के कारण उम्मीद से अधिक भीड़ भी रही लेकिन पानी की कमी के चलते ठीक से इलाज नहीं हो पाया।

कई मरीजों को इसी कारण वापस भी लौटना पड़ा। डॉक्टरों को लगातार स्प्रिट से हाथ साफ करता देख मरीजों का एक ही सवाल था क्या हमें भी स्प्रिट पीना पड़ेगी? अहिल्या उत्सव के उपलक्ष्य में सोमवार को अस्पताल की ओपीडी तो 1 बजे तक चालू रही लेकिन रात तक केवल इमर्जेसी केस ही लिए गए।

सुबह से ही ओपीडी में मरीजों की भीड़ लग गई। पर्ची काउंटर पर उम्मीद से ज्यादा भीड़ देखकर कम्प्यूटर विभाग में ज्यादा कर्मचारियों ने काम किया लेकिन पानी न होने के कारण दूर से आने वाले कई मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

ये क्या मजाक है?
धार से आई कौशल्या बाई ने बताया बहू को स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ओपीडी में जांच के लिए लेकर आई थी लेकिन पता चला पानी न होने के कारण कोई भी जरूरी जांच नहीं की जाएगी। अब वापस लौटना पड़ेगा। केशरबाग से आई लीलादेवी ने बताया डॉक्टर जांच करें तो कैसे।

पूरे अस्पताल में एक बूंद भी पानी नहीं है। सबसे बड़े अस्पताल में पानी खत्म है। यह कैसा मजाक है। स्टाफ नर्सो के अनुसार कुछ समय के लिए तो टंकी से बाल्टी भर-भरकर विभाग में पानी लाया गया पर बाद में परेशानी हो रही थी क्योंकि यहां पानी ज्यादा उपयोग आता है।

कोई व्यवस्था नहीं
दो मोटरों में से एक खराब ही पड़ी है जिसे पीडब्ल्यूडी को रिपेअर करने के लिए कहा है। दूसरी ठीक करने में सुबह से कर्मचारी मशक्कत में जुट गए थे। कर्मचारियों का कहना था शाम तक ही पानी उपलब्ध करवाया जा सकेगा। भोजन के लिए स्टोर कर रखे गए पानी का उपयोग किया जा रहा है।

कर्मचारियों ने हाथ खड़े किए
अस्पताल के विभागों के साथ ही टॉयलेट्स साफ करने वाले कर्मचारियों ने भी हाथ खड़े कर दिए। उनका कहना था पानी के बिना सफाई कैसे हो? लोगों को हाथ धोने के लिए भी पानी चाहिए। जब वही उपलब्ध नहीं है तो सफाई कैसे करें। थोड़ी गंदगी हटाने के लिए झा़डू तो लगा दी है लेकिन गीले कपड़े या पानी से सफाई मुमकिन नहीं।

नया पंप लगा देंगे
नए पंप का ऑर्डर दे दिया है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने वादा किया है कि वे रात तक किसी भी हाल में नया पंप लगा देंगे। खराब पड़ी मोटरें पुरानी हैं इसलिए पार्ट्स मिलना मुश्किल हो रहा है।
डॉ. चंद्रहास कुलकर्णी, अधीक्षक एमवायएच

दम तोड़ चुकी हैं पाकिस्तान मेड मोटर
एमवायएच में फिलहाल दो मोटरें लगी हैं और दोनों ही 50 साल पुरानी हैं। पाकिस्तान में बनाई गई इन मोटरों का मेंटेनेंस करना पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को भी अब महंगा पड़ रहा है। जितने में मेंटेनेंस हुआ उतने में कई बार नई मोटरें लगाई जा सकती थी लेकिन पिछले कई सालों में इस दिक्कत तो सुलझाने का बीड़ा किसी ने नहीं उठाया। पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों का कहना था हम तो खैर मनाते हैं कि नया पंप लगाया जा रहा है।

पीडब्ल्यूडी के सब इंजीनियर पी.आर. इंदौरे ने बताया दोनों मोटरें 50 साल पुरानी हैं। पाकिस्तान में बनी किलरेस्कर कंपनी की इन मोटरों को बार-बार रिपेयर करना मुश्किल इसलिए हो जाता है क्योंकि मोटर का इम्प्यूलर व शाफ्ट हर 6 महीने में दम तोड़ देता है। इम्प्यूलर पानी को तेजी से फेंकने में मदद करता है तो शाफ्ट एक रॉड होता है जो मोटर को सहारा देता है।

हर बार रिपेयरिंग में हजारों रुपए का खर्च आ जाता है। इतने में तो नई मोटर ही आ सकती है। मैं 4 सालों से विभाग में हूं। तब से अब तक करीब 3-4 बार मोटर खराब हो चुकी हैं। लंबे समय से खराब पड़ी एक मोटर के पुर्जे तो कई मुश्किलों के बाद पुणो से मंगवा लिए हैं। अन्य मोटर को ठीक करने की कोशिश में जुटे हैं। डॉ. कुलकर्णी के निदेशानुसार नया पंप मंगवा लिया है जो इन दोनों के मुकाबले बेहतर काम करेगा।





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