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नई दिल्ली.
किसानों को मुफ्त में बिजली देने की योजना की खामियों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दो टूक कह दिया है कि पानी के आर्थिक और व्यावसायिक इस्तेमाल पर किसी भी किस्म की राहत को हमें भूलना ही होगा।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर अफसोस जताया कि किसानों को मुफ्त बिजली दिए जाने से जगह-जगह पंप लगाकर लोगों ने भूजल का असीमित दोहन करना शुरू कर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्लोबल वर्ा्िमग और जलवायु परिवर्तन के कारण पेय जल का संकट भी गहराने जा रहा है।
मंगलवार को यहां राष्ट्रीय भूजल कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर हम सस्ती बिजली दे सकते हैं तो भूजल को बचाने के लिए भी प्रोत्साहन देने वाली योजनाएं भी ला सकते हैं। इसके लिए जुर्माने और इनाम की एक मिली-जुली योजना लागू करना होगी।
इस मौके पर जल संसाधन मंत्री सैफुद्दीन सोज ने भूजल के बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई तो मशहूर कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने कहा कि भारत में मामला पानी की कमी का नहीं बल्कि उसका प्रबंधन है।