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खातों ने खोला करोड़ों का खेल

चंडीगढ़ : विजिलैंस ब्यूरो ने पंजाब के पूर्व डीजीपी एस.एस. विर्क और उनके रिश्तेदारों के आधा दर्जन से ज्यादा बैंक खाते सील कर छानबीन शुरू कर दी है। अफसरों का कहना है कि इनमें भारी लेन-देन से विर्क की कलई तो खुल ही रही है, उनके बिजनेसमैन होने की पुष्टि भी हो रही है। सारे ट्रांजैक्शंस उनके कार्यकाल में हुए हैं, इसलिए विजिलैंस ने उन्हें दबोचने के लिए इसे आधार बनाया है।

अफसरों ने कहा, विर्क ने अधिकतर संपत्ति 2000-2007 के बीच अर्जित की। इस अवधि में पांच साल कैप्टन सरकार रही। विर्क ने इस अवधि में एडीजीपी से डीजीपी तक का सफर तय किया। विजिलैंस के जुटाए रिकार्ड के अनुसार, विर्क ने ज्यादातर संपत्ति जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त से बनाई। कुछ लैंड माफिया से उनके नजदीकी संबंध की पुष्टि भी जांच में हुई है।

जमीन के धंधे से आई रकम जांच अफसरों का कहना है कि ज्यादातर रकम प्लॉट्स की अवैध खरीद-बिक्री को लेकर इधर से उधर की गई है। पुष्टि के लिए विजिलैंस ने कुछ प्रॉपर्टी डीलरों के बैंक खातों और राजस्व विभाग के दस्तावेजों को आधार बनाया है। जब-जब विर्क की बेनामी संपत्ति बिकी, डीलरों के जरिए रकम विर्क व उनके रिश्तेदारों के खातों में जमा हुई। विजिलैंस के अनुसार, विर्क के व्यक्तिगत खाते में सितंबर 2000 से अगस्त 2007 के बीच 3 करोड़ से ज्यादा धनराशि का लेन-देन हुआ। उनके भाई राजदीप सिंह विर्क के खाता नंबर 1541000031600 में नवंबर 2003 से अगस्त 2007 के बीच 3 करोड़ से ज्यादा का लेन-देन हुआ।

हिसाब-किताब नहीं तो ब्लैकमनी विजिलेंस का दावा है कि विर्क और उनके रिश्तेदारों के पास आधिकारिक तौर पर इन रुपयों का हिसाब-किताब नहीं है। ऐसे में यह रकम ब्लैकमनी करार दी जा सकती है।

500 करोड़ की प्रॉपर्टी! विजिलेंस ने अब तक विर्क और उनके रिश्तेदारों की नामी-बेनामी 100 करोड़ की प्रॉपर्टी पता लगाई है। अफसरों का दावा है कि छानबीन की समाप्ति तक संपत्ति का ब्योरा 500 करोड़ से ऊपर जाएगा।

विर्क के लेफ्टिनेंट्स.. विजिलेंस ने विर्क के कुछ लेफ्टिनेंट्स का खुलासा किया है जिन्होंने उनको करोड़पतियों की कतार में खड़ा करने में अहम योगदान दिया।

-अविनाश सिंह ग्रेवाल जीरकपुर में विर्क की करीब 15 एकड़ जमीन बिकवाने में अहम भूमिका निभाई। विर्क ने अपनी पत्नी और खुद के ज्वाइंट अकाउंट से अविनाश को इसके एवज में चेक नंबर-304978 से 6 लाख रुपए का भुगतान किया। इसी रकम के जरिए विजिलेंस ने अविनाश की गर्दन दबोची। विर्क की असलियत खोलने वाला अविनाश का बयान विजिलेंस के पास दर्ज है।

बलबीर सिंह: यह कॉन्ट्रैक्टर है। इसने जीरकपुर में विर्क की जमीन की प्लॉटिंग कराकर बिकवाने में अहम भूमिका निभाई। विजयपाल सिंह डिंपी: कांग्रेस नेता होने के साथ प्रॉपर्टी डीलर भी है। विर्क और उसके संबंधों के बारे में ज्यादा बताने की जरूरत नहीं है। वार विडो मोहिंदर कौर की 4 एकड़ जमीन हड़पने में उसने विर्क की पूरी मदद की। इस लैंड डील के लिए विर्क और उनकी पत्नी के ज्वाइंट खाते से इसे 50 लाख भुगतान किया गया था। यह भी गिरफ्तारी हो चुका है।

सुखविंदर सिंह सुक्खी: यह पूर्व आतंकी है। विर्क ने इसे मृत घोषित कर हरजीत सिंह काहलो का फर्जी नाम देकर इसे पनाह दी। संपत्ति बनाने में विर्क ने इसका भरपूर इस्तेमाल किया।

अनुराग सक्सेना: विर्क की देख-रेख में सक्सेना और सुक्खी संयुक्त रूप से ट्रैवल एजेंसी चलाते हैं। मोटी रकम लेकर कई लोगों को इन्होंने अवैध ढंग से विदेश भेजे हैं। सक्सेना की दिल्ली में एक सिक्योरिटी एजेंसी भी है। इस एजेंसी के जरिए विर्क ने पंजाब पुलिस में करोड़ों रुपए के सिक्योरिटी आइटम्स खरीदवाए। इसमें मोटा खेल हुआ।





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