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वर्ल्डकप के लगभग 6 माह बाद ट्वेंटी20 वर्ल्ड चैंपियनशिप एक रोचक प्रयोग होगा जो मुझे 1975 के पहले विश्वकप की याद दिलाता है। 32 साल पहले हमें यह नहीं मालूम था कि वनडे मैच को गंभीरता से लिया जाएगा। अभी तक ज्यादा ट्वेंटी20 नहीं खेले गए है ओर यह देखा गया है कि टेस्ट और वनडे में अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीमें इस फॉरमेट में भी अच्छा खेलती है। दुनिया भर के गेंदबाजों को यह फिक्र है कि वे किस प्रकार बल्लेबाजों के अनुकूल पिचों पर विकेट ले सकेंगे। ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी काफी मजबूत है। ऐसी परिस्थिति में गेंदबाजों को आक्रामक रवैया अपनाना पड़ेगा। ऑस्ट्रेलिया के अलावा न्यूजीलैंड को भी इस फॉरमेट का थोडा अनुभव है।
उनके पास इस फॉरमैट में कई ऑलराउंडर है। भारत और इंग्लैड सीधे सीरीज से आ रहे हैं। भारत को राहुल द्रविड़, सचिन और गांगुली जैसे सीनियर खिलाडियों के बगैर अच्छा खेलना होगा। उनके कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अभी तक केवल एक ट्वेंटी20 गेम खेला है। साउथ अफ्रीका और वेस्टइंडीज दोनों मजबूत टीमें है। वेस्टइंडीज के पास अच्छे बल्लेबाज है पर उनके गेंदबाज भरोसेमंद नहीं है। (गेम प्लान)