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शरीफ की सियासत और जनरल का डर

सम्पादकीय: तानाशाह का सबसे बड़ा डर यह होता है कि लोग उससे डरना छोड़ देंगे। पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ आजकल इसी डर के दौर से गुजर रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को हवाई अड्डे से ही वापस भेजकर मुशर्रफ ने अपने डर को सार्वजनिक कर दिया है। वर्ष 2000 में जब नवाज शरीफ देश के बाहर जा रहे थे, तो उनके चेहरे पर भय था और मुशर्रफ आश्वस्त नजर आ रहे थे।

सोमवार को नजारा बदला हुआ था। शरीफ बिना डर के पाकिस्तान चले आए थे और सत्ता के सारे सूत्र हाथ में होने के बावजूद जनरल मुशर्रफ डरे-सहमे से लगे। नवाज को यह अभय कहां से मिला है और मुशर्रफ को भयभीत बनाने वाली ताकत क्या है?

दरअसल यह जनता की ताकत है जो 2000 में शरीफ के खिलाफ थी और आज मुशर्रफ के खिलाफ है। और चूंकि मुशर्रफ विरोधी लड़ाई की अगुआई शरीफ ही कर सकते हैं, इसलिए जनता शरीफ के साथ है।

जनता को मुशर्रफ के खिलाफ खड़े होने का हौसला न्यायपालिका और मीडिया ने दिया है। दरअसल यह विभिन्न स्तंभों की मिली-जुली ताकत का नतीजा है। इसी ताकत के बल पर जनता जनरल के खिलाफ खड़ी हो गई है और जो भी मुशर्रफ के खिलाफ मोर्चा खोलता है, वह उसी के साथ हो जाती है।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी अपने निलंबन को लेकर मुशर्रफ के खिलाफ सड़क पर उतरे, तो उनकी लड़ाई अवाम की लड़ाई बन गई। मुशर्रफ ने मीडिया पर हमला बोला, तो जनता मीडिया के पक्ष में खड़ी हो गई।

जनता के बदले हुए मिजाज ने ही नवाज शरीफ को फिर से पाकिस्तान की राजनीति में प्रासंगिक बना दिया है। घबराहट में मुशर्रफ का हर दांव उलटा पड़ता नजर आ रहा है। नवाज के पुनर्निर्वासन का लाभ भी उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग(एन) को जरूर मिलेगा। बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और दमन के बावजूद पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह कम होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है।

उधर मुशर्रफ पर न्यायपालिका की अवमानना का मामला भी बन सकता है, क्योंकि शरीफ को पाकिस्तान लौटने और वहां रहने की छूट सुप्रीम कोर्ट ने ही दी थी। कोर्ट की वैसे भी जनरल पर टेढ़ी नजर है। ऐसे में बेनजीर से समझौता हो जाता है तो भी मुशर्रफ की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आतीं, क्योंकि जनरल से हाथ मिलाकर बेनजीर खुद अपनी प्रासंगिकता खो देंगी।

मतलब यह कि मुशर्रफ चारों ओर से मुसीबतों से घिरे हैं। फिर भी मुशर्रफ आसानी से हार मानने वाले नहीं हैं। आज उनका डर ही उनकी ताकत है। डरा हुआ जनरल कुछ भी कर सकता है।





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