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इंदौर: यहां तो कमरे भी नहीं, ऐसा कॉलेज तो होना ही नहीं चाहिए.. दो साल से गवर्निग बॉडी की बैठक क्यों नहीं हुई.. इसे रिपेयर कराकर भी क्या होगा? यह तो जर्जर हो चुका.. जो तकनीक सीख रही हैं उससे क्या फायदे? इन्हीं तेवरों के साथ प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा स्नेहलता श्रीवास्तव ने पांच बड़े शिक्षा संस्थानों का निरीक्षण किया।
उन्होंने भवनों की बदहाली से लेकर व्यवस्था के दोष तक पच्चीसों कमियां रेखांकित की। विकास की गतिविधियां भी देखी। न्यू साइंस कॉलेज में उनके सामने ही प्राचार्य और जनभागीदारी अध्यक्ष के बीच जमकर विवाद भी हुआ। श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्ट्टियूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (एसजीएसआईटीएस) से शुरू हुआ दौरा महिला पॉलिटेक्निक राजेंद्रनगर, होलकर साइंस व न्यू साइंस कॉलेज होते हुए गवर्नमेंट आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज (जीएसीसी) तक पहुंचा।
एसजीएसआईटीएस
क्यों नहीं हुई गवर्निग बॉडी की बैठक?
प्रमुख सचिव ने संस्थान के डायरेक्टर आर.सी. सारस्वत से पूछा गवर्निग बॉडी की बैठक की क्या स्थिति है? पता चला दो साल से नहीं हुई तो आपत्ति ली और मीटिंग जल्दी कराने के निर्देश दिए। केंद्र सरकार के सहयोग से १क् करोड़ की लागत से बन रहा एडवांस टेक्नोलॉजी सेंटर देखा। डीम्ड यूनिवर्सिटी का प्रोजेक्ट की फाइल भी तलब की।
महिला पॉलिटेक्निक
तकनीक से क्या फायदा?
महिला पॉलिटेक्निक पहुंचीं प्रमुख सचिव ने टेक्सटाइल विभाग में चल रही मशीनों को देख प्राचार्य से पूछा ये इंडस्ट्री की जरूरतो के मुताबिक हैं या नहीं? डिप्लोमा कर रही छात्राओं से पूछा यहां जो तकनीक सीख रही हैं उससे क्या फायदे हैं?
होलकर कॉलेज
फंड हैं विभाग की मंजूरी नहीं
होलकर कॉलेज में श्रीमती श्रीवास्तव ने ऑटोनोमस बॉडी की कार्यप्रणाली की जानकारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र धाकड़ से ली। उन्होंने बताया प्राइवेट संस्थानों से स्पर्धा करने के लिए नई सुविधाएं जुटाना हैं। हमारे पास फंड तो है, विभाग की मंजूरी चाहिए। एडमिशन के मामले में कॉलेज सबसे आगे है। जो रह जाते हैं शिकायत करते फिरते हैं।
जीएसीसी
रिपेयर कराने से भी क्या होगा?
प्रमुख सचिव ने प्राचार्य डॉ. अशोक वाजपेयी से जर्जर भवन के बारे में पूछा तो जवाब मिला अनुमति नहीं मिलने से काम अटका है। तब श्रीमती श्रीवास्तव ने कहा रिपेयर कराकर भी क्या होगा? यह तो जर्जर हो चुका है।