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जेल में खूनी संघर्ष

जोधपुर: prison सेंट्रल जेल में बंद हत्या के सजायाफ्ता कैदियों के बीच मंगलवार दोपहर खूनी संघर्ष हो गया। रसोई के बाहर ही दो गुट के कैदी लोहे का सरिया, पानी के पाइप व चाकू लेकर एक-दूसरे पर टूट पड़े। जेल में हुई खूनी जंग में चार कुख्यात कैदी गंभीर रूप से घायल हो गए जिनमें से एक को एमजीएच में भर्ती किया गया है।

बहुचर्चित नटवर हत्याकांड के मुख्य आरोपी शंकर खोखर को कुछ दिन पहले ही उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वह करीब एक साल से जेल में ही था। जेल में सजा काट रहे कुख्यात अपराधियों के दो गुट बने हुए हैं जिनमें आए दिन छोटी-मोटी लड़ाई होती रहती है। मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे जब सभी कैदी बैरक से बाहर आए तो बैरक संख्या 4 व 11 के कैदियों के बीच कहासुनी हो गई। कुछ कैदी रसोई में खाना बनाने व पानी भरने का काम कर रहे थे।

झगड़े की शुरुआत नटवर हत्याकांड के मुल्जिम शंकर खोखर व श्यामलाल हत्याकांड के मुल्जिम इंद्रसिंह के बीच हुई, फिर दोनों पक्षों के कैदी कमल टाक, श्रवण विश्नोई समेत आठ-दस कैदी भी आ गए और आपस में भिड़ गए। किसी ने डंडा व सरिया उठा लिया तो कोई पानी का पाइप तोड़ कर ले आया। सब्जी काटने वाला भी चाकू उठा कर आ गया। फिर जेल में खूनी जंग शुरू हो गई। दस-मिनट तक ये कैदी खून के प्यासे होकर एक-दूसरे पर टूट पड़े। इस बीच जेलर जगमोहन व अन्य गार्ड वहां आए और उन्हें अलग किया। लहूलुहान कैदियों का जेल की डिस्पेंसरी में इलाज किया गया।

और भी कैदी जख्मी हुए
जेलर जगमोहन और पुलिस अधिकारी दिनेशकुमार व चैनसिंह महेचा ने बताया कि कैदियों की रंजिश के बारे में स्पष्ट बात सामने नहीं आई है, मगर उनका संदेह है कि दो गुटों के बीच पुरानी रंजिश है। श्यामलाल हत्याकांड के मुल्जिम इंद्रसिंह आदि भी जेल में है। नटवर हत्याकांड का शंकर खोखर, प्रहलाद हत्याकांड का श्रवण विश्नोई, रेणू हत्याकांड का कमल टाक व एक अन्य हत्या में रामस्वरूप विश्नोई भी साथ हैं। इंद्रसिंह के अलावा अन्य मुल्जिम कभी एक साथ रहते थे और वे श्यामलाल के दोस्त थे। यही वजह मानी जा रही है कि इंद्रसिंह व अन्य मुल्जिमों के बीच झगड़ा चलता रहता है।

थानाधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि इन चारों को इंद्रसिंह व उसके गुट के कैदियों ने इन चारों को पीटा था। ये चार तो एमजीएच आ गए, मगर चोटें तो दूसरे गुट के कैदियों को भी लगी है, मगर वे एमजीएच लाने जैसी गंभीर स्थिति में नहीं थे। जेलर जगमोहन ने बताया कि कुछ अन्य कैदियों को मामूली चोटें आई हैं, उनका जेल की डिस्पेंसरी में इलाज कर दिया है।

जेल से किया फोन!
जेल में हुई जंग की सूचना जख्मी कैदियों के घरवालों व दोस्तों तक भी पहुंच गई। संदेह यही है कि जेल से किसी ने मोबाइल फोन से उनके घरवालों को फोन कर दिया था। सूचना मिलने पर काफी संख्या में उनके दोस्त व परिजन एमजीएच तक पहुंच गए। एक बार तो अस्पताल में तनाव की स्थिति बन गई। पुलिसकर्मियों को इमरजेंसी वार्ड का गेट बंद करना पड़ा। बाद में सरदारपुरा थानाधिकारी चैनसिंह महेचा व उदयमंदिर थानाधिकारी दिनेश कुमार ने लोगों को वार्ड से बाहर निकाला।

रात में बताया पुलिस को
जेल प्रशासन ने खूनी संघर्ष की सूचना पुलिस को रात में दी। डिस्पेंसरी में इलाज होने के बाद कैदियों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें एमजीएच ले जाने की मजबूरी हुई तब पुलिस को बुलाया गया। पुलिस जेल की मिनी बस में बैठा कर शंकर, श्रवण व कमल को एमजीएच ले आई। श्रवण बेहोशी की हालत में था, उसके गुप्तांग पर लात मारी गई थी। उसे कैदी वार्ड में भर्ती किया गया, अन्य को उपचार के बाद जेल भेज दिया। एक घंटा बाद रामस्वरूप को भी एमजीएच लाया गया। उसका हाथ लोहे के पाइप की चोट से टूट गया था। शंकर के सिर, मुंह व हाथों पर धारदार वस्तु के जख्म थे जो संभवत: सब्जी काटने वाले चाकू से लगे थे।

बेबस हुई पुलिस
एमजीएच के इमरजेंसी वार्ड में शंकर खोखर व कमल टाक से सरदारपुरा थाने के एसआई जेडी चारण ने बयान लेने का प्रयास किया तो उन्होंने इनकार कर दिया। बाद में थानाधिकारी चैनसिंह महेचा वहां आए तो इन कैदियों ने उन्हें भी कुछ बताने से मना कर दिया। थानाधिकारी व कैदियों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि कैदी गाली-गलौच करने कहने लगे कि पुलिस उनका क्या बिगाड़ लेगी, वे तो जेल में हैं। दोनों के बीच काफी देर तक वाद-विवाद हुआ और कैदी चिल्लाए जा रहे थे, मगर लाचार पुलिस सब सहन करती रही।

* दोपहर करीब साढ़े तीन बजे कैदियों के बीच झगड़ा हुआ था। पानी भरने के दौरान कैदी आपस में लड़ पड़े। जख्मी हुए चार कैदियों का पहले डिस्पेंसरी में इलाज किया गया तथा रात में उन्हें एमजीएच ले जाया गया। पुलिस को भी रिपोर्ट दे दी है।
— जगमोहन, जेलर

* शाम को जेल से यह रिपोर्ट मिली थी कि कैदियों में झगड़ा हो गया है। इतनी ज्यादा मारपीट की सूचना नहीं थी। रात में अस्पताल लाने पर घटना की गंभीरता पता चली, मगर जख्मी कैदियों ने भी अपना मुंह नहीं खोला।
— दिनेश कुमार, एसएचओ





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