जयपुर: कृषि भूमि पर बसी गृह निर्माण सहकारी समितियों की कॉलोनियों में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके काटे गए भूखंडों का भी सरकार नियमन करेगी। उन जमीनों पर बने निर्माणों को तोड़ा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने दो बीघा से ज्यादा भूमि के अतिक्रमणों के नियमन को भी हरी झंडी दे दी है। सरकार के इस फैसले से करीब ढाई सौ कॉलोनियों के भूखंडधारियों को फायदा मिलेगा। इनका मामला करीब साढ़े तीन साल से अटका हुआ था।
प्रदेश के कई शहरों में गृह निर्माण सहकारी समितियों ने योजनाओं के बीच में या आसपास आई सरकारी जमीनों पर भी भूखंड काट दिए हैं। इन पर अब मकान बन चुके हैं, इसलिए शुल्क लेकर इनका नियमन करने का फैसला किया गया है।
स्वायत्त शासन विभाग के अनुसार सरकारी जमीन पर अतिक्रमणों के नियमन का प्रावधान तो पहले भी था, लेकिन उसमें निकायों को निजी कॉलोनी में दो बीघा से कम जमीन तक ही अतिक्रमणों का नियमन करने की छूट थी। इससे ज्यादा भूमि पर अतिक्रमणों के मामले में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से कई मामले अटके हुए थे।
केबिनेट सब कमेटी से लेनी होगी अनुमति : एक निजी कॉलोनी में दस बीघा जमीन पर हुए अतिक्रमणों को नियमित करने के पहले स्थानीय निकायों को मंत्रिमंडलीय उप समिति से इजाजत लेनी होगी। इसके लिए संबंधित निकाय स्वायत्त शासन विभाग के माध्यम से सरकार को प्रस्ताव बनाकर भिजवाएंगे।
आरक्षित दर का 25 फीसदी लगेगा नियमन शुल्क : कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के मामलों में सरकारी भूमि के अतिक्रमण नियमित करने के लिए आरक्षित दर का 25 फीसदी नियमन शुल्क लेने का प्रस्ताव है। बाकी मामलों में सामान्य दर से ही नियमन शुल्क लिया जाएगा।
* इस फैसले से कई भूखंडधारियों को राहत मिलेगी। नियमन होने से स्थानीय निकायों की भी आय बढ़ेगी। पिछले कई साल से अटके इन कॉलोनियों के नियमन शिविर भी लग सकेंगे।
-परविंदरसिंह पंवार, प्रमुख सचिव स्वायत्त शासन एवं नगरीय विकास विभाग