जालंधर :ग्लोबलाइजेशन और निजीकरण के दौर में एजुकेशन का भी कमर्शियलाइजेशन हो गया है। स्टूडैंट्स और उनके पेरेंट्स एजुकेशन को इन्वैस्टमेंट मान रहे हैं और एक निश्चित अवधि के बाद उससे फायदा चाहते हैं। यही कारण है कि स्टूडैंट्स में सीखने की चाह लगातार कम होती जा रही है और वे उतना ही पढ़ते हैं, जितना जॉब पाने के लिए जरूरी है। सिटी भास्कर ने टटोली स्टूडैंट्स की नब्ज।
शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है, स्टूडैंट्स में क्यूरियोसिटी खत्म होती जा रही है। पढ़ाई का मकसद सिर्फ जॉब हासिल करना रह गया है। 90 फीसदी स्टूडैंट्स ऐसे हैं जो कोर्स की किताबों के अलावा कुछ नहीं पढ़ते।
सुबह न्यूज पेपर देख लेते हैं। कुछ इसी तरह के नतीजे निकले हैं स्टूडैंट्स से बातचीत में। सिटी के इंजीनियरिंग, कंप्यूटर व साइंस के स्टूडैंट्स का मानना है कि वे जॉब के लिए पढ़ाई कर रहे हैं और इस फील्ड में आए हैं।
उनको कोर्स और इसकी डैप्थ से कोई मतलब नहीं है। मतलब है अच्छे सैलरी पैकेज से। पढ़ाई के लिए इंटरैस्ट और नॉलेज से ज्यादा जरूरी है किस फील्ड में प्लेसमेंट अच्छा है और कहां हैं ज्यादा जॉब अपॉरच्यूनिटीज। सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात यह है बहुत कम स्टूडैंट्स हायर एजुकेशन में जाना चाहते हैं।
जब उनसे पूछा गया कोर्स के अलावा कोई किताब पढ़ी है तो अधिकतर का जवाब था नहीं। इंजीनियरिंग स्टूडैंट्स संदीप कंबोज, सौरभ चड्ढा, सुखप्रीत सिंह, उज्जवल सैली, सचिन अरोड़ा, अभिनव शर्मा, दीपक, ऋचा अरोड़ा, संदीप सिंह, सुमित बजाज व विमल प्रभाकर ने कहा जॉब अपॉरच्यूनिटीज को देखते हुए ही वे इस फील्ड में आए हैं। इसमें काफी ज्यादा स्कोप है और कंपनियां बहुत अच्छा सैलरी पैकेज देती हैं। * ऊपर दिए गए आंकड़े भास्कर द्वारा सिटी के 100 स्टूडैंट्स पर किए गए सर्वे के अनुसार हैं।
टीचर्स की बात एनआईटी में आईसीई डिपार्टमेंट के प्रो. कुलदीप नागला ने बताया पिछले कुछ समय से स्टूडैंट्स का आईटी सैक्टर में रुझान बढ़ा है, क्योंकि जॉब के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने कहा इससे देश को काफी फायदा भी हो रहा है लेकिन आने वाले समय में इसके नुकसान भी हो सकते हैं। एमबीए फिर भी इंजीनियरिंग से मेल खाती है लेकिन आईटी हर किसी को सूट नहीं करती। अगर स्टूडैंट्स का रुझान इसी तरह से ज्यादा सैलरी पैकेज और जॉब अपॉरच्यूनिटीज में रहा तो आने वाले 10-15 सालों में न तो अच्छे टीचर्स मिल सकेंगे और न ही एक्सपर्ट।
डीएवी इंस्टीच्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलॉजी के मैकेनिकल डिपार्टमेंट के हैड अमित कोहली ने बताया एजुकेशन पूरी तरह से चेंज हो चुकी है। कंपनियां अच्छे पैकेज दे रही हैं जिसके चलते स्टूडैंट्स ने इन्हीं कंपनियों में अपना फ्यूचर दिखता है। इससे चलते देश में बहुत कम रिसर्च वर्क हो रहा है। कोई नई इंवेंशन नहीं हो रही है। इसके लिए हर कॉलेज में रिसर्च एंड डिवैलपमेंट प्रोग्राम चलाए जाने चाहिए।