जोधपुर: केंद्र ने 2012 तक हर घर तक बिजली पहुंचाने का ख्वाब तो दिखा दिया है, लेकिन बजट देने में कंजूसी और राज्य के सीमित संसाधनों के बूते कम से कम पश्चिमी राजस्थान में तो नहीं लगता कि अगले एक दशक तक भी यह ख्वाब पूरा हो पाएगा।
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत वर्ष 2009 तक राज्य के सभी गांवों को बिजली पहुंचाने और 2012 तक सभी गांवों के हर घर को बिजली देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय इलाके में जहां गांव-ढाणियों के बीच न केवल सैकड़ों किमी का फासला है, बल्कि ट्रांसमिशन सिस्टम बिछाना टेढ़ी खीर है, वहां हर घर तो दूर, बल्कि विद्युतीकृत गांव के सभी घरों तक बिजली पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।
जोधपुर डिस्कॉम के अधीन आने वाले 10 जिलों का क्षेत्रफल 1 लाख 84 हजार वर्ग किमी है, जबकि इतने व्यापक भूभाग में बिजली तंत्र बिछाने पर भी उतनी ही राशि दी जा रही है, जितनी अन्य राज्यों को। यहां तक कि जितनी राशि दी जा रही है, वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। डिस्कॉम ने भी इस योजना के तहत जब 6 जिलों की योजना बनाई तो व्यवहारिक पृष्ठभूमि का ध्यान ही नहीं रखा। नतीजतन, केंद्र ने 139 करोड़ रुपए की योजना मंजूर कर दी।
हालत यह है कि जब जमीनी हकीकत पर पैसा खर्च होना शुरू हुआ तो पता लगा कि जिस जोधपुर जिले के लिए पहले 29 करोड़ की योजना बनाई गई थी, उसके हर घर तक बिजली पहुंचाने के लिए ही 193 करोड़ रुपए चाहिए। इस लिहाज से जोधपुर डिस्कॉम को ही बिजली पहुंचाने तथा बिजली पैदा करने के लिए नौ हजार करोड़ रुपए की दरकार है, जिसके जुगाड़ की फिलहाल कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही।
क्योंकि बिजली पहुंचाना है महंगा
जोधपुर डिस्कॉम का समस्त कार्य क्षेत्र मरुस्थलीय है। इसके 10 जिलों में गांव दूर-दूर तक बसे हुए हैं। एक गांव से दूसरे गांव की दूरी कई किलोमीटर होने से वहां तक विद्युत लाइनों को ले जाने में भारी व्यय आता है। इसके अलावा गांवों की बसावट भी काफी छितराई हुई है जिससे प्रत्येक घर तक विद्युत तंत्र पहुंचाना भी चुनौती पूर्ण व काफी खर्चीला कार्य है।
डिस्कॉम का अनुमान है कि प्रत्येक राजस्व गांव के हर घर तक बिजली पहुंचाने के लिए 32 हजार रुपए प्रति कनेक्शन व्यय करने पड़ेंगे, जबकि इसकी एवज में मिल रहे हैं महज 2000 रुपए। बीपीएल के कनेक्शन तो मुफ्त में दिए जाने हैं। जाहिर है, एक गांव के लिए साढ़े छह लाख रुपए का आबंटन इस क्षेत्र के लिए तो नाकाफी ही है।
* पूर्व में बनाई योजना के लिए पैसा कम पड़ रहा है। इसके लिए सरकार अपने स्तर कार्यक्रम बना रही है।2012 तक सभी को बिजली मिले। इसके लिए बजट तो चाहिए ही। उच्च स्तर की बैठकों में भी इस पर विचार होता रहा है।
—एसआर बंसल सीएमडी, जोधपुर डिस्कॉम