News
Metros
Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़ :विदेश जाने की हसरत ने चंडीगढ़, लुधियाना और जालंधर में इंग्लिश सीखने के धंधे को काफी चमका दिया है। पंजाब-चंडीगढ़ में यह मासिक 50 करोड़ से अधिक का कारोबार बन गया है। ब्रिटिश सरकार द्वारा पर्यटकों को छोड़ अन्य सभी इमिग्रेशन एवं वीजा के लिए इंग्शिल स्पीकिंग अनिवार्य करने से यह कारोबार और बढ़ेगा।
आइलट्स के लिए होड़ :
इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम (आइलट्स) में हर माह हजारों स्टूडेंट टेस्ट देते हैं। 6 साल पहले ब्रिटिश काउंसिल ने यह टेस्ट सेंटर चंडीगढ़ में शुरू किया था। अब लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और पटियाला में भी ऐसे सेंटर बन गए हैं। वहां इसकी कोचिंग देने वालों की भी भरमार हो गई है। इंग्लिश इंस्टीट्यूट के मोहिंदर सिंह का कहना है कि कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूके, न्यूजीलैंड आदि देशों ने एजूकेशन और इमिग्रेशन वीजा के आवेदकों के इंग्लिश टेस्ट के लिए आइलट्स को मुख्य मानक तय कर दिया है।
पंजाब से हर साल इन देशों में 50 हजार से अधिक स्टूडेंट और नौजवान एजूकेशन वीजा और इमिग्रेशन लेकर जाते हैं। जबकि टेस्ट देने वालों की तादाद एक लाख से ऊपर हो जाती है।
फीस 72 सौ रुपए : ब्रिटिश काउंसिल टेस्ट के लिए करीब 7200 रुपए फीस लेती है। स्टूडेंट कोचिंग पर 5 से 15 हजार रुपए अलग से खर्च करते हैं।
कुल 235 इंस्टीट्यूट : अकेले चंडीगढ़ में 85 इंस्टीट्यूट आइलट्स की कोचिंग दे रहे हैं। लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और पटियाला में इनकी कुल संख्या 150 के करीब है। प्रति माह 12 से 15 हजार स्टूडेंट कोचिंग लेते हैं। इनमें से करीब आधे रिपीट कोचिंग वाले होते हैं। साल भर में ये 35-40 करोड़ रुपए कोचिंग से बना लेते हैं।
हर माह 5-6 हजार स्टूडेंट देते हैं टेस्ट :
ब्रिटिश काउंसिल के एजूकेशन इन्फॉर्मेशन ऑफिसर विवेक सैनी के अनुसार काउंसिल महीने में दो बार टेस्ट कंडक्ट करती है जिसमें 2 से 3 हजार स्टूडेंट बैठते हैं। इतने ही स्टूडेंट आईडीपी के जरिए टेस्ट देते हैं। पंजाब के दोआबा क्षेत्र से सबसे अधिक स्टूडेंट एवं इमिग्रेशन के इच्छुक यह टेस्ट देते हैं।
फ्रेंच भी सहायक : कनाडा में हर साल 20 से 25 हजार पंजाबी इमिग्रेशन हासिल करते हैं। उनमें से अधिकांश आइलट्स पास करते हैं। वे इमिग्रेशन के लिए अतिरिक्त स्कोर पाने के लिए फ्रेंच की भी सहायता लेते हैं। फ्रेंच कनाडा की दूसरी आधिकारिक भाषा है। इसकी जानकारी अतिरिक्त मदद करती है। इसीलिए एल्यां फ्रांसेज जैसे संस्थानों में इमिग्रेशन के इच्छुक पंजाबियों की संख्या बढ़ रही है। पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ और पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला में भी फ्रेंच सीखने वालों की संख्या बढ़ रही है।