कोटा:
राज्य में आईआईटी के स्थान चयन के लिए गठित पांच सदस्यों की केंद्रीय विशेषज्ञ समिति राज्य सरकार के विमान से मंगलवार सुबह कोटा पहुंची। समिति के सदस्यों ने हवाई अड्डे से 18 किमी दूर झालावाड़ मार्ग पर रानपुर-बंधा धर्मपुरा के पास प्रस्तावित स्थल का अवलोकन किया।
समिति के संयोजक और मानव संसाधन मंत्रालय के संयुक्त सचिव रवि माथुर ने बताया कि राज्य सरकार से जमीन के लिए केवल कोटा का ही प्रस्ताव मिला है, इसलिए समिति ने सभी शहरों का पक्ष सुनने के बाद कोटा की प्रस्तावित एकमात्र लोकेशन का अवलोकन किया है। जिला प्रशासन से इस बारे में आंकड़े और सूचनाएं मांगी गई हैं। समिति प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण कर अपनी रिपोर्ट ही मंत्रालय को सौंपेगी।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय की स्वीकृ ति के बाद रिपोर्ट के बारे में राज्य सरकार को सूचित किया जाएगा। समिति के सदस्यों ने डीसीएम विश्रामगृह में कोटा की तथ्यात्मक जानकारी के लिए तैयार किए गए प्रजेंटेशन को देखा।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों, उद्यमियों, शिक्षाविदें और नागरिकों का पक्ष भी सुना। समिति के सदस्य कोटा में उपलब्ध संसाधनों और आधारभूात सुविधाओं से संतुष्ट दिखाई दिए। राज्य सरकार की ओर से तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव जीएस संधु भी साथ थे। दोपहर ढाई बजे वे जयपुर के लिए रवाना हो गए।
कमेटी के सवाल प्रशासन के जवाब
कोचिंग से आईआईटी प्रभावित हो सकती है?
आईआईटी फेकल्टी के एथिक्स बहुत ऊंचे होते हैं यहां कई सालों से इंजीनियरिंग कॉलेज व तकनीकी विवि पर कोचिंग का कोई दुष्प्रभाव नहीं आया है।
हर आईआईटी एक विशिष्ट क्षेत्र में काम करती है, उसके लिए यहां क्या है?
कोटा में न्यूक्लियर, थर्मल, गैस और हाइडल पावर सेक्टर में रिसर्च व कंसलटेंसी की अपार संभावनाएं हैं।
लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति कैसी है?
कोटा में करीब पचास हजार कोचिंग छात्र पढ़ रहे हैं। देश के हर राज्य से छात्राएं यहां सुरक्षित रहकर पढ़ाई कर रही है।
तकनीकी विवि में क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं?
60 इंजीनियरिंग, 60 मैनेजमेंट और 20 एमसीए कॉलेजों की संबंद्धता, 365 एकड़ क्षेत्रफल। कंप्यूटर सेंटर व आधुनिक लेब सुविधा उपलब्ध है।
एक हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे
तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए देश में तीन नए आईआईटी पर योजना आयोग द्वारा 11वीं पंचवर्षीय योजना में एक-एक हजार करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान है। राज्य में प्रस्तावित आईआईटी प्रोजेक्ट को पूरा होने में करीब 5-6 साल लगेगें। फिलहाल योजना आयोग ने इसके लिए 650 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। प्रत्येक आईआईटी के लिए करीब 120 करोड़ रुपए सालाना आबंटित होंगे।