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महंगाई ने बिगाड़ा नाश्ते का जायका

भोपाल: पिछले छह महीनों में मक्खन, ब्रेड से लेकर सेव और दूध तक के भाव में बढ़ोतरी ने लोगों के नाश्ते का जायका बिगाड़ दिया है। सुबह का नाश्ता लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है।

नाश्ते में उपयोग की जाने वाली वस्तुओं के महंगा होने का मुख्य कारण कच्चे माल के दामों में लगातार बढ़ोतरी होना है। बढ़ती महंगाई से आम उपभोक्ता के साथ ही दुकानदार भी परेशान हैं। उपभोक्ताओं का मानना है कि सुबह का नाश्ता और दोपहर के भोजन का खर्चा लगभग बराबर पड़ता है, क्योंकि नाश्ते में उपयोग की जाने वाली शायद ही ऐसी कोई वस्तु हो, जिसके दामों में बढ़ोतरी नहीं हुई हो। पिछले चार महीने में मक्खन के भाव में दस रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी हो चुकी है।

क्यों बढ़ रहे भाव : न्यू मार्केट में डेयरी संचालित करने वाले पंकज डंग का कहना है कि अप्रैल से दूध के भाव बढ़ने के कारण मक्खन और अन्य उत्पादों के भाव बढ़े हैं। उन्होंने बताया कि मक्खन में तो प्रति किलो दस रुपए तक बढ़ोतरी हुई है। साल्टेड बटर, जो आमतौर पर नाश्ते में उपयोग किया जाता है, पहले 164 रुपए किलो था, अब 174 रुपए किलो हो गया है। श्री डंग ने बताया कि दूध में भी प्रति लीटर करीब दो रुपए की बढ़ोतरी होने के कारण ऐसी स्थिति बनी है। 100 ग्राम का मक्खन का पैकेट अब 18 रुपए का हो गया है।

बेसन और मैदा के भाव भी बढ़े : सेव और ब्रेड के भाव में बढ़ोतरी होने का मुख्य कारण बेसन, मैदा और तेल का महंगा हो जाना है। नमकीन व्यवसायी अशोक अग्रवाल ने बताया कि चार महीने पहले सेव 76 रुपए प्रति किलो थे, लेकिन अब 80 रुपए हो गए हैं। इसकी मुख्य वजह बेसन और तेल के भाव में बढ़ोतरी होना है।

श्री अग्रवाल ने बताया कि बढ़ी हुई महंगाई से विक्रेता खुद परेशान हैं। एमपी नगर के नमकीन विक्रेता आनंदीलाल राठी ने बताया कि जब तेल, मैदा, बेसन के भाव आसमान पर होंगे, तो अन्य वस्तुओं के भाव तो बढ़ेंगे ही।

न्यू मार्केट के प्रोटींस व्यवसायी हरीश आरतवानी ने बताया कि दूध के भाव डेढ़ साल में तीन बार बढ़ चुके हैं। आखिरी बार यह करीब चार महीने पहले बढ़े थे। यही हाल ब्रेड का भी है। चार सौ ग्राम सेंडविच ब्रेड नौ रुपए से बढ़कर दस रुपए की हो गई है, जबकि स्वीट ब्रेड दस से बारह रुपए की हो गई है। नाश्ते में उपयोग की जाने वाली सामग्री के भाव बढ़ने से उपभोक्ता भी हैरत में हैं।

छात्र अवधेश सिंह ने बताया कि नाश्ता महंगा होने के कारण कई बार उनका बजट गड़बड़ा जाता है।





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deep
Wednesday, 12th Sep 2007, 13:22
nashta mahnga ho jane se college aur schools me padh rahe students jo is par jadya depand rahte hain,unke liye to ab ye time khuch na kha ke apni pocket ko hi dehkhte rahna hoga.. bahar rahkar zadya problems student ko hi aati hain....