भोपाल: स्वास्थ्य विभाग की अनियमितताओं और मनमानियों की धमक केंद्र तक जा पहुंची है। इसके चलते मध्यप्रदेश में क्षय नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटी सीपी) को केंद्र की मदद बंद करने की चेतावनी मिली है। इस कार्यक्रम के तहत अब तक केंद्र से 29 करोड़ रुपए मिले और 27 करोड़ रुपए खर्च हुए। ताजा मामला एंटी टीबी ड्रग्स की खरीदी का है। बताया जाता है कि ये खरीदी भी निलंबित संचालक डॉ. योगीराज शर्मा के कार्यकाल में हुई। केंद्र ने इस पर सख्त आपत्ति लेते हुए जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई करने को कहा है।
आयकर विभाग के छापे और योगीराज के निलंबन की खबरों के साथ अब एक नया विवाद शुरू हो गया है। केंद्र की टीबी डिवीजन के सदस्यों की फील्ड विजिट के दौरान प्रदेश में मनमाने तरीके से एंटी टीबी ड्रग्स की खरीदी के मामले सामने आए हैं। इसकी जानकारी मिलते ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव नरेश दयाल ने मुख्य सचिव राकेश साहनी को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि राज्य में स्ट्रेप्टोमाइसिन की खरीदी कर जिलों में सप्लाई की जा रही है, जबकि यह पहले से ही आरएनटीसीपी के तहत केंद्र द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है।
इसके अलावा योजना के मुताबिक 0.75 ग्राम की दवा की बजाय जिलों में एक ग्राम की दवा पहुंचाई जा रही है। अपने पत्र में उन्होंने बताया है कि इस फीड बैक से स्टेट टीबी आफिसर को भी अवगत कराया गया और प्रमुख सचिव और संचालक को भी सूचित किया गया, लेकिन इस गंभीर मामले में किसी कार्रवाई की रिपोर्ट राज्य की ओर से भी नहीं भेजी गई।
श्री दयाल ने कहा है कि मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और सभी संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए जाएं कि वे गाइडलाइन के मुताबिक टीबी मरीजों के हित में अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करें। उन्होंने चेताया है कि यदि प्रदेश एंटी टीबी ड्रग्स की खरीदी जारी रखना चाहता है तो बेहतर होगा कि केंद्र सरकार आरएनटीसीपी को मदद देना बंद कर दे। उन्होंने कहा है कि जो दवाएं मप्र में खरीदकर जिलों में भेजी गई हैं वे टीबी नियंत्रण की डॉट पद्धति की कार्ययोजना के अनुरूप नहीं हैं। यह जरूरी है कि ये दवाएं वापस ली जाएं और इस मामले की जांच कर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
किस मात्रा में और क्यों खरीदी?
विभागीय सूत्रों के अनुसार केंद्र की हिदायतों के बावजूद पिछले साल विभाग में बगैर किसी सलाह-मशवरे के सीधे ये दवा खरीदी गईं। केंद्र के दल ने मप्र में भ्रमण के दौरान इस गंभीर गलती को पकड़ा। अब केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव का पत्र मिलने के बाद मुख्य सचिव ने विभाग को जवाब-तलब किया है। यह पूछा जा रहा है कि किस मात्रा में और किन परिस्थितियों में दवाएं खरीदी र्गई?
सवाल अनुत्तरित
जब भास्कर ने इस बारे में स्वास्थ्य मंत्री अजय विश्नोई से सवाल किए तो उन्होंने बताया कि वे बड़वानी में दौरे पर हैं और बुधवार को भोपाल आने पर मामले की जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह पाएंगे। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य मदनमोहन उपाध्याय ने फोन पर कई बार संपर्क करने के बावजूद इस विषय पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।