नई दिल्ली:
केंद्र सरकार के बाद अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने भी सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर रामायण के पौराणिक चरित्रों के अस्तित्व पर सवालिया निशान लगाया है।
एएसआई निदेशक (स्मारक) सी दोरजी द्वारा दायर हलफनामे के मुताबिक, ‘याचिकाकर्ताओं ने मुख्यत: वाल्मीकि रामायण, तुलसीदास की रामचरित मानस और अन्य पौराणिक सामग्री को आधार बनाया है। ये सब प्राचीन भारतीय साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि इन्हें ऐसे ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में नहीं लिया जा सकता जो उनमें वर्णित चरित्रों या घटनाओं के अस्तित्व को निर्विवाद रूप से सिद्ध कर सके।’
सोमवार को केंद्र सरकार द्वारा दायर हलफनामे में भी रामसेतु की अवधारणा को पूरी तरह बेबुनियाद बताया था कि इस बात का कोई वैज्ञानिक सुबूत नहीं है कि साढ़े छह हजार वर्ष पहले भगवान राम ने यह पुल बनवाया था।
गौरतलब है कि इस संबंध में दायर एक याचिका में रामसेतु को संरक्षित प्राचीन स्मारक घोषित कर इसे सेतुसमुद्रम केनाल प्रोजेक्ट के लिए न तोड़ने के निर्देश की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट याचिका पर 14 सितंबर को सुनवाई करेगा।
हलफनामा ईशनिंदा : भाजपा
* ‘यह हिंदू आस्था का अपमान है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दशहरा क्यों मनाते हैं, यदि उनकी सरकार भगवान राम के अस्तित्व को ही नहीं मानती।’
- विजयकुमार मल्होत्रा, भाजपा
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