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कलाम और शेखावत ‘बेघर’

नई दिल्ली: पद छोड़ने के एक माह बाद भी पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम और पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत को नए सरकारी बंगले नहीं मिले हैं। संबद्ध विभाग इनमें सुधार कार्य निबटा ही नहीं पाया है। जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त कलाम ‘हाई रिस्क’ श्रेणी वाले ऑफिसर्स हट में रह रहे हैं। दिल्ली छावनी स्थित इस साधारण आवास की पेशकश उन्हें सेना प्रमुख जनरल जेजे सिंह ने की थी।

कलाम के कार्यालय ने नगर विकास मंत्रालय से बार-बार कहा है कि कलाम को 10, राजाजी मार्ग पर आवंटित बंगले को जल्द से जल्द उनके रहने योग्य बना दिया जाए, लेकिन केंद्रीय लोक निर्माण विभाग बड़ी धीमी गति से काम कर रहा है। सुरक्षा एजेंसियां लश्कर-ए-तैय्यबा जैसे संगठनों से खतरे को देखते हुए इस बंगले में कुछ उपकरण लगाना चाहती हैं, लेकिन उन्हें सहयोग नहीं मिल रहा है।

अवैध कब्जा गैर जमानती बने
नई दिल्ली:
supreme courtसुप्रीम कोर्ट ने सरकारी बंगलों पर अवैध रूप से कब्जा जमाए रखने की राजनेताओं और अफसरों की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि इसे फौजदारी और गैर जमानती अपराध बनाने के लिए कानून में संशोधन पर विचार किया जाए। जस्टिस बीएन अग्रवाल की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र और राज्यों से इस मामले में सुझाव देने को कहा है। अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।

बेंच ने यह निर्देश उस जनहित याचिका पर दिया है, जिसमें कहा गया है कि देश के विभिन्न हिस्सों में रसूख वाले राजनेताओं और अफसरों ने सरकारी बंगलों पर अवैध कब्जे कर रखे हैं। बंगलों को खाली कराने और कब्जे की प्रवृत्ति को रोकने के लिए सरकार को निर्देश दिए जाएं।

अवैध कब्जों का तिहरा शतक!
* अकेले दिल्ली में तीन सौ से ज्यादा सरकारी बंगलों पर राजनेता अवैध रूप से टिके हुए हैं।
* बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद ये दबंग लोग बंगले खाली करने को तैयार नहीं हैं।
* कई विशिष्ट लोगों ने तो अपने बंगले मासिक किराये पर भी दे रखे हैं।
* यही नहीं, कई महारथी तो सरकारी बंगलों के लॉन को शादियों और अन्य पार्टियों के लिए किराये पर देने से भी नहीं हिचकते।

कोर्ट ने क्या कहा
* आईपीसी की धारा 441 (आपराधिक घुसपैठ) को गैर जमानती बनाया जाए। वर्तमान में यह जमानती अपराध है।
* अवैध कब्जे करने वाले राजनेताओं और अफसरों पर इस धारा के तहत मुकदमे दर्ज किए जाएं।
* ऐसे लोगों से पेनल्टी और किराया वसूलने की प्रक्रिया को और सख्त बनाया जाए।
* कोर्ट ऐसे लोगों को सेवा से बर्खास्त करने का निर्देश पहले ही दे चुकी है।





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