अजमेर:
सरावगी मोहल्ले में बुधवार को जर्जर मकान के मलबे में दबने से फोटोग्राफर कैलाश मोरवाल (48) की मौत हो गई। वह छज्जे पर खड़ा होकर मलबा हटाने के लिए जगह देख रहा था,तभी छज्जा नीचे आ गिरा। हृदय विदारक पहलू यह है कि सुबह करीब साढ़े सात बजे से लेकर रात सवा बारह बजे तक उसकी लाश मलबे में दबी रही और घरवाले उसकी तलाश करते रहे।
पिछले दिनों बरसात के दौरान मोरवाल का चार मंजिला पुराना मकान गिरने के कगार पर पहुंच गया था। हादसे की आशंका के चलते इलाके के लोगों की शिकायत पर नगर परिषद के दल ने गत 29 अगस्त को मकान का क्षतिग्रस्त हिस्सा ढहा दिया था। मोरवाल ने बाकी का मलबा अपने स्तर पर हटाने के लिए नगर परिषद में प्रतिवेदन दिया था।
मकान क्षतिग्रस्त होने के कारण वह परिवार सहित इलाके में एक अन्य मकान में शिफ्ट हो गया था। रोजाना वह अपने स्तर पर धीरे-धीरे मकान का मलबा हटा रहा था। बुधवार सुबह करीब साढ़े सात बजे वह जर्जर मकान में पहुंचा और मलबा हटाने के लिए छज्जे पर खड़े होकर नीचे झांक रहा था, एकाएक छज्जा टूट गया। कैलाश उसके साथी ही नीचे गिरकर मलबे में फंस गया और उसके ऊपर मलबा गिर गया। सिर में चोट और सांस घुटने से उसकी मौत हो गई। उस समय वहां कोई नहीं होने के कारण दिन भर घरवाले और आस-पास के लोगों को इस का पता नहीं चला। दिन में घर नहीं आने पर परिजनों ने उसकी संभावित जगहों पर तलाश की।
रात करीब साढ़े दस बजे लोगों ने जर्जर मकान में पास की बिल्डिंग की छत से झांक कर देखा तो मलबे में दबी कैलाश की लाश दिखाई दी। जानकारी मिलते ही कई लोग आ गए, लेकिन मकान की हालत को देखते हुए कोई भीतर से लाश निकालने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी गई। दरगाह थाना प्रभारी सीताराम माहीच, एएसआई परसराम और अन्य पुलिस कर्मियों ने आकर स्थिति का जायजा लिया। एएसपी ललित माहेश्वरी, एडीएम सिटी स्नेहलता पंवार और नगर परिषद सभापति धर्मेन्द्र गहलोत भी पहुंचे।
पुलिस और दमकल कर्मियों ने करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद लाश मलबे से निकाली और पोस्टमार्टम के लिए जेएलएन अस्पताल के चीरघर में रखवा दी।