जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राजस्थान प्रवेश कर अधिनियम-1999 की वैधता को चुनौती देने संबंधी मामला वृहदपीठ को सौंप दिया है। यह आदेश न्यायाधीश पीबी मजमूदार व न्यायाधीश डीएन थानवी की खंडपीठ ने लक्ष्मी सीमेंट व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया। खंडपीठ के इस फैसले के बाद अधिनियम को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है।
इससे पहले 21 अगस्त को ही हाईकोर्ट के न्यायाधीश राजेश बालिया व माणक मोहता की खंडपीठ ने वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार करते हुए इस अधिनियम को असंवैधानिक करार दे दिया था। इस खंडपीठ ने राज्य सरकार को वसूल की गई कर की राशि वापस लौटाने के आदेश भी दिए थे। यह राशि करीब आठ सौ करोड़ रुपए थी। राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका पेश करने की तैयारी कर रही थी।
इसी बीच, प्रवेश कर के मामले में लंबित अन्य याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दूसरी खंडपीठ के समक्ष बुधवार को अतिरिक्त महाधिवक्ता एनएम लोढ़ा ने राज्य सरकार का पक्ष रखा।
लोढ़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की सात न्यायाधीशों की पीठ ने 14 जुलाई 2007 को जिंदल स्टेनलेस व अन्य मामलों की सुनवाई में रिमांड करते हुए कहा था कि हाईकोर्ट यह तय करे कि यह अधिनियम किसी कर की क्षतिपूर्ति के लिए बनाया गया है या नहीं।
लोढ़ा ने कहा कि हाईकोर्ट को सिर्फ क्षतिपूर्ति के बिंदु को ही तय करना था, जबकि हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को पूरे अधिनियम को ही असंवैधानिक करार दे दिया। इस संबंध में हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में भी तीन मामले लंबित हैं। मुख्य फैसला सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर ही निर्धारित होना था। सुनवाई के बाद खंडपीठ ने इस मामले में संवैधानिक व्याख्या के बिंदु देखते हुए इसे वृहद्पीठ को सौंपने का आदेश दिया।