जयपुर:
राज्यपाल शीलेंद्र कुमार सिंह ने कहा है कि वे दरबार संस्कृति में विश्वास नहीं करते। वे तो पीड़ित लोगों के घर जाकर उनकी तकलीफ दूर करने में भरोसा रखते हैं। इसीलिए वे सबसे पहले राजस्थान की सेवा कर चुके ऐसे लोगों से मिले जो अब स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण घरों में ही रहते हैं।
राज्यपाल ने बुधवार को प्रदेश में अपने पहले साक्षात्कार में ‘भास्कर’ से कहा कि बंद हिंसा है, इससे समाज को नुकसान होता है। लोगों को इस सोच से ऊपर उठना चाहिए क्योंकि हिंसा का कोई औचित्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की नई पीढ़ी को गांधी जी के तीन संदेश देना चाहते हैं। सब सत्य बोलें, दिलो-दिमाग और आत्मा से अहिंसावादी बनें, कोई असहाय मिले तो उसके आंसू जरूर पोंछें।
* राजस्थान के लिए आप क्या सपना लेकर आए हैं?
-संवैधानिक अधिकारों के तहत काम करना है। मेरे तो सपनों की भी सीमा है।
* इन सीमाओं के बावजूद राजस्थान से आपका जुड़ाव कैसा है?
-राजस्थान मेरे लिए अजनबी नहीं है। यहां मेरे स्नेही हैं। मैं यहां के गांवों से परिचित हूं। मेरा जन्म बुलंदशहर (यूपी) के गांव में हुआ, वहां मैं पढ़ा भी हूं।
* प्रदेश के लोगों की सेवा के लिए सरकार से आप क्या अपेक्षा रखेंगे?
जो भी सेवा हो सकेगी करूंगा, लेकिन जो सरकार को करना है, उसे वही करेगी। मैं उस पर अतिक्रमण नहीं करूंगा।
* आपको जब राजस्थान के राज्यपाल बनाए जाने की खबर मिली तो..
-मैं अरुणाचल प्रदेश में था। मैंने पैकिंग शुरू नहीं की, बल्कि हेलीकॉप्टर लेकर मैंने प्रदेश के पूर्व और पश्चिम क्षेत्रों का दौरा किया। वहां के लोगों से मिला। बात की।
* विधानसभा सत्र शुरू होगा तो आप उनसे क्या कहना चाहेंगे?
-इंग्लैंड में कहावत है ‘स्पीच ऑफ द प्राइम मिनिस्टर बाइ द थ्रोन’। यहां भी तो वही बात है। वह मेरा भाषण थोड़े होगा, वह तो सरकार की बात होगी।
* कई बार राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव हो जाता है।
-संविधान के दायरे में रहकर ही काम करेंगे। संवैधानिक पदों से जुड़े लोगों को औचित्य का निर्वहन करना चाहिए।
* अभी आपको क्या चीज बुरी लग रही है?
-जब छोटे-छोटे थे तो भूत-प्रेत के किस्से सुनते थे। भूत-प्रेतों की कहानियां पढ़ते थे। अब ये सब इलेक्ट्रोनिक मीडिया में देखता हूं तो लगता है समझ ही नहीं है। ये भी कोई दिखाने की चीजें हैं।
* आप मीडिया से क्या अपेक्षा करते हैं?
-इस देश में लोगों का मन सृजनशील कामों में लगाना चाहिए, न कि गल्पों और किंवदंतियों में।
* राजस्थान के लोगों को आप समस्याओं से कैसे निजात दिलाएंगे?
-मैं राज्यपाल हूं। मेरी जुबान जरूर बंद रहेगी, लेकिन इससे एक नागरिक के रूप में मुझे मिले अधिकार कम नहीं होते। लोगों की जो भी परेशानियां आएंगी, उन्हें मेरी सरकार जरूर हल करेगी। मैं जब चाहूं तब किसी से भी कुछ पूछ सकता हूं।
* बहस चल रही है कि राज्यपाल के पद का कोई औचित्य नहीं है?
-प्रयोग करके देख लो। लोकतांत्रिक प्रणाली है। लेकिन जब तक संविधान में संशोधन नहीं किया जाता तब तक तो यह पद इसी तरह रहेगा, भले ही यह सड़ी हुई लौकी ही क्यों न हो।