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पहली बार हाईकोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच

ग्वालियर:

सिंगल जज बेंच द्वारा रेवेन्यू बोर्ड/ ट्रिब्यूनल सम्बन्धी फैसले पर दिया गया फैसला के विरुद्ध डबल बेंच में रिट याचिका मेन्टेनेबल है या नहीं इस पर मप्र हाईकोर्ट की लार्जर बेंच 14 सितंबर को यहां विचार करेगी। यह लार्जर बेंच पहली बार ग्वालियर में बैठेगी।

हाईकोर्ट में वर्तमान में यह व्यवस्था है कि सिंगल जज द्वारा दिए गए आदेश के विरुद्ध संबंधित पार्टी हाईकोर्ट की डबल बेंच में रिट अपील प्रस्तुत करता है। कुछ समय से हाईकोर्ट में बोर्ड ऑफ रेवेन्यू एवं ट्रिब्यूनल के काफी संख्या में मामले आ रहे हैं।

इनसे जुड़े मामलों को लेकर रिट अपील सुनवाई हेतु जब हाईकोर्ट की डबल बेंच के समक्ष प्रस्तुत होती है, उसमें कई बार इसको लेकर बहस होती है कि क्या ऐसे मामलों में सिंगल जज द्वारा दिए गए निर्णय पर सुनवाई की जा सकती है, या नहीं।

14 सितंबर को सुबह साढ़े दस बजे बैठने वाली लार्जर बेंच में उसमें प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश एके पटनायक, न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के प्रशासनिक जज एके गोहिल, न्यायमूर्ति सुभाष संवत्सर, न्यायमूर्ति राजेन्द्र मेनन शामिल हैं।

पहली बार ग्वालियर में बैठेगी..
मप्र हाईकोर्ट की ही एक डबल बेंच ने एक रिट अपील को अस्वीकार करते हुए कहा था कि यह रिट अपील स्वीकार ही नहीं हो सकती। इसको डबल बेंच ने फुल बेंच को रैफर कर दिया था। फुल बेंच ने इसकी सुनवाई कर निर्णय दिया कि रिट अपील की सुनवाई हो सकती है।

डबल बेंच के इस फैसले के खिलाफ एक याचिकाकर्ता ने सुप्रीमकोर्ट में एसएलपी लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने डबल बेंच के निर्णय को सही बताया था। इस पर विचार के लिए पुन: डबल बेंच में अपीलकर्ता गया, उस पर पुन: विचार न कर डबल बेंच ने इसे लार्जर बेंच को रैफर कर दिया।





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