जालंधर छह साल तक सत्ता में रहने के बावजूद राम मंदिर निर्माण की दिशा में उल्लेखनीय कदम न बढ़ाने पर संघ परिवार के घटकों के निशाने पर रही भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि उसे फिर से एक बड़ा मुद्दा हाथ लगा है। बुधवार के आंदोलन को देखकर लगता है कि भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बनाने से पीछे नहीं हटेगी। सुप्रीम कोर्ट को दिए केंद्र के जवाब से उसके मूल मुद्दे के अस्तित्व पर संकट पैदा हो गया है।
यदि राम ने सेतु नहीं बनवाया और रामकथा का ऐतिहासिक आधार नहीं है, तो फिर अध्योध्या में राम की जन्मभूमि पर बने मंदिर का आधार क्या है?
मंदिर मामले पर हो सकता है असर केंद्र और पुरातत्व विभाग के जवाब से राम मंदिर मुद्दे पर असर पड़ना तय है। इसका कारण यह है कि मंदिर मुद्दे पर पुरा तत्व विभाग की रिपोर्ट पर सारा दारोमदार है। ऐसे में जब विभाग एक ओर राम का अस्तित्व ही नकारता है तो मंदिर के पक्ष में दिए गए उसके प्रमाण की विश्वसनीयता कठघरे में आ जाएगी।