उदयपुर:
भूमि अवाप्ति का भय दिखाकर करोड़ों की जमीन के वारे न्यारे हो रहे हैं। इसमें भूमि दलालों की भूमिका ज्यादा संदिग्ध है। बलीचा-एकलिंगपुरा बाइपास की दक्षिणी विस्तार योजना में प्रस्तावित बारह सौ हैक्टर जमीन में से भूमि दलाल 100 बीघा जमीन नियमन से मुक्त करवा चुके हैं। ये ही स्थिति चिकलवास आवासीय योजना की है जहां भूमि दलालों ने किसानों से कौड़ियों में जमीन खरीद ली।
आबादी बढ़ने के साथ यूआईटी द्वारा नई योजनाएं बनाकर शहर विस्तार किया जाता है। इसके लिए जमीन अवाप्त की योजना बनाकर ट्रस्ट बैठक में स्वीकृति ली जाती है इसके बाद अधिसूचना के लिए राज्य सरकार को भेजा जाता है। सरकार से मंजूरी मिले उससे पहले ही भू माफिया सक्रिय हो जाते हैं। सांठ-गांठ से जमीन को अवाप्ति से मुक्त करा लेते हैं। बलीचा-एकलिंगपुरा बाइपास के दक्षिण में आने वाला क्षेत्र दक्षिण विस्तार योजना में लिया गया है। 19 फरवरी, 2005 को ट्रस्ट बैठक में मंजूरी के बाद अवाप्ति की योजना मुख्य नगर नियोजक द्वारा जून, 2006 में राज्य सरकार को भेजी गई थी। सरकार के पास यह योजना अभी तक लंबित है इसके पहले ही सौ बीघा जमीन को अवाप्ति से मुक्त करवा लिया गया।
न्यास से स्पष्ट नहीं किया
राज्य सरकार ने जमीन को अवाप्ति से इस आधार पर मुक्त किया कि न्यास द्वारा यह स्पष्ट नहीं किया गया कि योजना कुल कितने क्षेत्र में प्रस्तावित है। सवा साल बाद भी राज्य सरकार द्वारा योजना की स्वीकृति जारी नहीं हुई है। प्रस्तावित योजना में इसी तर्क के आधार पर और भी जमीन अवाप्त से मुक्त हो सकती है।
फिर कटती है कनवर्टेड कॉलोनियां
अवाप्ति से पहले ही योजना को इस तरह फ्लेश किया जाता है कि संबंधित किसानों, खातेदारों को पता चल जाता है कि उनकी भूमि अवाप्त होने वाली है। इसी के साथ भू माफिया भी सक्रिय हो जाते हैं, जो अवाप्ति से मिलने वाली मुआवजा राशि से अधिक राशि देने का प्रलोभन देते हैं। इसके बाद ऊपरी सांठ-गांठ कर जमीन को अवाप्ति से मुक्त भी करा लेता है। यूआईटी कनवर्टेड प्लॉट के नाम से भूमाफिया फिर करोड़ों कमाते हैं।
पछता रहे हैं चिकलवास के किसान
पिछले साल ट्रस्ट बैठक में चिकलवास आवासीय योजना के नाम पर चिकलवास, रामगिरी, बड़गांव, बेदला आदि गांवों की साढ़े सात सौ हेक्टेयर जमीन अवाप्त करने की घोषणा हुई थी। क्षेत्रवासियों द्वारा आंदोलन छेड़ा गया। सांसद किरण माहेश्वरी ने गांवों का दौरा भी किया। ग्रीन बेल्ट के आधार पर यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई, लेकिन इससे पहले ही भूमि दलालों ने अवाप्ति का दिखाकर सैकड़ों बीघा जमीन ओने-पोने दामों में खरीद ली। बड़गांव से आगे रामगिरी गांव की 60 बीघा जमीन का बेचान हुआ। दलालों ने 10 से 13 लाख रुपए बीघा से सौदा किया। वर्तमान में प्लानिंग कटने के बाद उसी जमीन की दर साढ़े चार सौ रुपए वर्ग फीट है। प्रस्तावित योजना में आ रही जमीन के पट्टे भी जारी हो गए हैं। भूमि दलालों द्वारा किसानों को अवाप्ति का डर बताकर जमीन खरीदने का अभियान अब भी जारी है।
* अवाप्ति के लिए प्रस्तावित योजना में भूमि मुक्त करने या नियमन का निर्णय करने संबंधी न्यास को कोई शक्तियां नहीं हैं। यह निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर होते हैं। प्रस्तावित योजना के 12 सौ हेक्टेयर में से करीब सौ बीघा जमीन को एनओसी मिली है। यह विगत दो वर्र्षो के दौरान हुआ है।
—उज्ज्वल राठौड़, सचिव, यूआईटी