पाली:
अपर सेशन न्यायालय (फास्ट ट्रैक) के न्यायाधीश रविंद्र कुमार जोशी ने दो मासूमों समेत पांच लोगों को मौत के घाट उतारने के बहुचर्चित मामले में लालाराम उर्फ लालिया भील को बुधवार को मृत्युदंड की सजा देने का आदेश दिया। फैसले को लेकर दिन भर अदालत परिसर में नागरिकों का जमावड़ा रहा।
अभियोजन के अनुसार 13 अगस्त, 2006 को भांवरी गांव में तालाब की रपट के पास एक शव पड़ा मिला। मृतक के गले पर कुल्हाड़ी से गंभीर वार के निशान थे।उसके हाथ-पैर भी बंधे हुए थे। शव की पहचान उसकी जेब से मिले मतदाता परिचय पत्र से भीमनाथ निवासी शिव कालोनी के रूप में हुई। इसमें अंकित पते के आधार पर पुलिस पाली के मंडिया रोड इलाके के शिव नगर में पहुंची।
यहां से जानकारी मिली कि आसन जिलेलाव गांव का भीमनाथ पुत्र प्रभुनाथ इन दिनों टैगोर नगर में एक जगह किराए के मकान में रह रहा है। बीएसएनएल एक्सचेंज के समीप आबाद इस मकान के मुख्य दरवाजे पर ताले को तोड़कर पुलिस ने अंदर जाकर देखा तो कमरे में भीमनाथ की पत्नी छोटी देवी तथा पुत्र कालूनाथ (9) व सालू उर्फ शिविया (5) के शव जमीन पर पड़े थे।. मकान की छत पर ट्रैक्टर चालक भंवरलाल मेघवाल का भी शत-विक्षत शव पड़ा था। इस हौलनाक घटना ने समूचे शहर को हिला कर रख दिया।
पुलिस ने शुरुआती चरण में ही मान लिया कि सभी की हत्या धारदार हथियार या कुल्हाड़ी से की गई है। एक साथ पांच हत्याओं के मामलों को सुलझाने के लिए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अमृत कलश ने अपने समय के शहर कोतवाल खुशालसिंह राजपुरोहित को लगाया। पुलिस ने मामले का राजफाश घटना के 24 घंटे बाद ही कर लिया। पुलिस के अनुसार इस घटना की जड़ आपसी लेनदेन से उपजा विवाद था। इस सिलसिले में राणा गांव से लालाराम उर्फ लालिया भील, राणा गांव का जबरिया उर्फ जबराराम भील तथा बुधाराम को गिरफ्तार किया गया।
मामले के अनुसंधान के दौरान पता चला कि उक्त सभी हत्याएं लालाराम उर्फ लालिया भील ने कुल्हाड़ी से की थीं। इसके बाद अपने बचाव के लिए भीमनाथ का शव ट्रैक्टर में ले जाकर उसने भांवरी तालाब के समीप पटक दिया तथा मृतक परिवार से लूटे गए गहने उक्त दोनों आरोपियों को बेच डाले थे। पुलिस ने गहनों की बरामदगी कर ली थी। इस मामले के अनुसंधान के बाद पुलिस ने न्यायालय में पेश कर दिया। सुनवाई के लिए पत्रावली अपर सेशन न्यायाधीश संख्या दो रविन्द्र कुमार जोशी की अदालत में भेजी गई थी।
गवाहों के ट्रायल,पत्रावली के अवलोकन तथा बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने खचाखच भरी अदालत में लालिया भील को फांसी की सजा के आदेश दिए। सरकार की ओर से लोक अभियोजक गणपतसिंह सोनीगरा ने पैरवी की। बचाव पक्ष की तरफ से कानाराम आगरी एडवोकेट ने बहस की।
दो को तीन-तीन साल की कैद
सामूहिक हत्याकांड के मामले में अन्य दो आरोपियों को अपर सेशन न्यायालय फास्टट्रैक ने शुक्रवार को ही तीन-तीन साल की सजा तथा अर्थ देड से दंडित करने की सजा सुना दी थी। लालिया के मामले में बचाव पक्ष के वकील की ओर से बहस का वक्त मांगने पर न्यायाधीश ने सोमवार की तारीख निर्धारित की थी। सोमवार को बचाव पक्ष के वकील ने अपनी तरफ से कई दलीलें पेश कीं। इसके बाद मंगलवार के लिए कुछ दस्तावेज पेश करने का वक्त मांगा था। मंगलवार को दस्तावेज पेश किए गए।