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सभी गरीब बुजुर्गो को पेंशन का तोहफा

नई दिल्ली: अगले साल मध्यावधि चुनाव की अटकलों के बीच केंद्र सरकार ने गुरुवार को आम आदमी को ध्यान में रखते हुए अनेक फैसले लिए। इनमें सभी गरीब बुजुर्गो को वृद्धावस्था पेंशन देने का फैसला भी शामिल है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (एनओएपीएस) के तहत पात्रता शर्ते में बदलाव के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई और गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) जिंदगी काट रहे 65 साल से ज्यादा उम्र के सभी बुजुर्गो को पेंशन देने का फैसला किया गया। अभी तक यह योजना सिर्फ बेसहारा बुजुर्गो के लिए थी। इस मौके पर कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में भी कई फैसले लिए गए।

सूचना और प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा स्वाधीनता दिवस पर की गई घोषणा के अनुरूप गरीब बुजुर्गो को पेंशन देने योजना पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की जयंती 19 नवंबर से विधिवत शुरू की जाएगी।

कितनों को फायदा, कितना खर्च :
* सरकार के फैसले से 1.57 करोड़ बुजुर्गे को फायदा होगा।* इन बुजुर्गो को पेंशन के तौर पर 400 रुपए महीना मिलेंगे।* इससे चालू वित्तीय वर्ष में सरकारी खजाने पर 4,300 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा।

कैबिनेट के अन्य फैसले :
* बच्चों के लिए मिड-डे मील योजना का कक्षा आठ के छात्रों तक विस्तार। अभी तक यह योजना छठवीं कक्षा तक सीमित थी।
* विस्तारित योजना शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े देश के 3,479 सरकारी और अनुदानित ब्लॉकों में इसी साल लागू होगी।
* अगले वित्तीय वर्ष में विस्तारित मिड-डे मील योजना को पूरे देश में लागू किया जाएगा।
* योजना का विस्तार शिक्षा गारंटी स्कीम और वैकल्पिक व उन्नत शिक्षा के तहत चल रहे केंद्रों तक भी किया जाएगा।
* योजना के तहत विशेष श्रेणी के 11 राज्यों को दी जाने वाली परिवहन सब्सिडी को 100 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ा कर 125 रुपए प्रति क्विंटल किया।
* सर्वशिक्षा अभियान के संशोधित फंडिंग पैटर्न को मंजूरी। राज्यों का अंशदान 50 फीसदी तक होगा। पहले यह 35 फीसदी था।
* उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए केंद्र 90 फीसदी अंशदान देगा। बाकी 10 फीसदी खर्चा राज्य उठाएंगे। संशोधित पैर्टन बीते अप्रैल से लागू।

सती कानून में संशोधन को मंजूरी टली :
सती विरोधी कानून में संशोधन के प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी नहीं मिल सकी। दासमुंशी के मुताबिक कैबिनेट का मानना है कि सती (रोकथाम) एक्ट,1987 में प्रस्तावित संशोधनों से अनेक तकनीकी मुद्दे जुड़े हैं। पहले उन पर गौर करने की जरूरत है।





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