विशेष टिप्पणी:
जो पुलिस प्रशासन आमतौर पर चक्काजाम, बंद हड़ताल आदि को विफल कर जनता की सुरक्षा का ध्यान रखता है, वही प्रशासन बुधवार को असहाय लोगों के साथ होती बदसलूकी का मूकदर्शक बना बैठा रहा।
हिन्दू संगठनों के देशव्यापी चक्काजाम ने आम जनता को भारी मुसीबत में डाल दिया था। प्रदेश में भाजपा सरकार होने से पुलिस ज्यादा कुछ कर न सकी। वैसे अलग-अलग शहरों में पुलिस कप्तानों एवं कलेक्टरों ने मंगलवार को ही दावे किए थे कि जनता के साथ ज्यादती नहीं होने दी जाएगी, और कानून व्यवस्था पुख्ता रहेगी..लेकिन ऐसा हुआ नहीं । वाहनों को रोकने वालों को कोई रोक नहीं पाया ।
पुलिस जनता की तरफ पीठ करके खड़ी दिखाई दी। जनता के आक्रोश को शांत करने के बारे में कोई नहीं सोच रहा था। इंदौर और कई अन्य स्थानों पर पुलिस और प्रेस के वाहनों, साधारण नौकरीपेशा एवं गरीब तबके के लोगों को हिन्दूवादी ताकतों के सामने बेवजह झुकना पड़ा। ये अलग बात है कि जिन्हें फ़जीहत का सामना करना पड़ा, उनमें से एक बड़ा वर्ग इन्हीं की राजनैतिक पार्टी के मतदाता माने जाते हैं।
‘रामभक्तों ने ठाना है, रामसेतु बचाना है’ ‘जय-जय श्रीराम’ के नारों के साथ लाखों हिन्दूवादी कार्यकताओं ने बुधवार को जिस एकता और संगठन शक्ति का प्रदर्शन किया उससे इन संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं में भले ही नई चेतना आई हो, लेकिन जनता में भारी नाराज़गी थी।
विद्यार्थी, डॉक्टर्स, पेशेन्ट्स सभी, चार घंटे से अधिक समय परेशान रहे पर कोई कुछ बोलने-करने वाला नहीं था। पुलिस का यह केसरिया रूप हम सभी के लिए नया है। बुधवार के चक्काजाम से लग रहा है कि ‘‘अयोध्या’’ का दूसरा अध्याय देश में शुरू होने जा रहा है। यानी और चक्काजाम और प्रदर्शन।
भाजपा का वोट बैंक इससे बढ़ेगा या घटेगा?
जिस समय देश में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों की आवाजाही के समय ट्रैफिक रोकने की व्यवस्था पर आलोचना हो रही हो, उस समय तीन-चार घंटे तक पूरे देश को रोककर रखने के कुप्रयासों को क्या कहा जाए ? ऐसे चक्काजामों से तो भगवान श्रीराम शायद ही प्रसन्न होते, सेतुबंध टूटने से बचने की बात तो और ही है।