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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर:
दस वर्ष से बंद पड़ी बिड़ला समूह की फैक्ट्री सिमको को दोबारा चालू करने की कवायद शुरू हो गई है। अमेरिकन कंपनी जेपी मॉर्गन ने फैक्ट्री की आर्थिक, तकनीकी एवं वैधानिक रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद सिमको की सभी देनदारियां चुकाकर पुन: चालू करने का निश्चय किया है। दीपावली के आसपास सिमको को चालू करने की पहल हो सकती है।
बताया जाता है कि बंद पड़ी सिमको को दोबारा से चालू कराने के लिए मप्र सरकार में मंत्री रह चुके भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र तोमर, जिनके विधानसभा क्षेत्र में यह फैक्टरी स्थापित है,काफी समय से प्रयास कर रहे थे। इन प्रयासों के कारण कई कंपनियों ने सिमको के संचालन की बागडोर अपने हाथ में लेने में दिलचस्पी दिखाई थी। इनमें जेपी मॉर्गन के अलावा जयप्रकाश इंडस्ट्रीज, जोसफ एण्ड कंपनी लिमिटेड एवं रुइया ग्रुप भी शामिल थे पर बाजी जेपी मॉर्गन के हाथ लगी।
जानकारी के मुताबिक जेपी मॉर्गन ने अन्य ग्रुपों को पीछे छोड़ते हुए 26 फरवरी 2007 को पंजाब एण्ड सिंध बैंक एवं 30 मार्च 2007 को यूको बैंक की देनदारियों का भुगतान करते हुए बीआईएफआर की स्वीकृति से सिमको का अधिग्रहण कार्य प्रारंभ कर दिया। बीती 30 अगस्त को बीआईएफआर की मीटिंग में यह बताया गया कि सेन्ट्रल बैंक की सभी देनदारियों को खरीदने हेतु जेपी मॉर्गन के प्रस्ताव को स्वीकृत करने के लिए बैंक की बोर्ड मीटिंग में प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
आईडीबीआई ने भी अपनी देनदारियों को बेचने हेतु जेपी मॉर्गन के प्रस्ताव प्राप्त होने की सूचना दी। जेपी मॉर्गन ने इस बैठक में बताया कि सिमको को पुन: चालू करने की विस्तृत रिपोर्ट एवं प्लानिंग बहुत जल्दी ही बीआईएफआर को प्रस्तुत कर दी जाएगी। नए मैनेजमेंट का सोचना है कि ग्वालियर में विश्वस्तरीय स्टील फाउन्ड्री के कारीगर हैं, उन्हें रोजगार प्रदान कर स्टील फाउन्ड्री का कार्य प्रथम चरण में शुरू होगा। कंपनी के वैगन डिवीजन को चालू करने हेतु इस फाउन्ड्री को उपयोग में लाया जाएगा।
सिमको : कब क्या हुआ ?
0 लगातार हो रहे नुकसान के कारण बिड़ला मैनेजमेंट ने सन् 1995 में कंपनी को बंद कर दिया ।
0 21 अगस्त 2002 को सिमको को बीआईएफआर ने रूग्ण इकाई घोषित कर दिया।
0 इसके बाद आईडीबीआई को ऑपरेटिंग एजेंसी नियुक्त करते हुए सिमको को पुन: चालू करने के प्रयास लगातार किए जा रहे थे।
सिमको का इतिहास
उपनगर ग्वालियर में स्थित सिमको फैक्टरी सन् 1950 से पूर्व जेसी मिल परिसर में टैक्स मैको के नाम से चलती थी, बाद में सिमको नाम देकर इसको अलग स्थापित किया गया। उस समय इस फैक्टरी में दो हजार श्रमिक कार्य करते थे, बाद में स्टील फाउन्ड्री एवं सिमको में 900 कर्मचारी रह गए थे।
सन् 1995-96 में यह फैक्टरी बंद हो गई थी। जेसी मिल के बाद सिमको व स्टील फाउन्ड्री के बंद हो जाने के बाद उपनगर ग्वालियर की रौनक खत्म हो गई है और वहां के लोग बेरोजगार होकर रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे कई लोगों ने आर्थिक तंगी के चलते मौत को गले लगा लिया था।
क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि
>> रोजगार दिलाने एवं अधिक से अधिक फैक्टरियों को ग्वालियर समेत अन्य जगह लाने के लिए मप्र सरकार और वे प्रयासरत हैं। सिमको फैक्टरी के चालू होने से हजारों लोगों के परिवारों के चेहरों पर रौनक लौटेगी। फैक्टरी का पुन: संचालन करने वाले प्रबंधकों को मप्र सरकार पूरा सहयोग देगी।
नरेन्द्र सिंह तोमर प्रदेश अध्यक्ष भाजपा व क्षेत्रीय विधायक
>> सिमको के पुन: चालू होने से लोगों को रोजगार मिलेगा। फैक्टरी प्रबंधन को इंटक पूरा सहयोग करेगी।
राजेन्द्र नाती वरिष्ठ नेता इंटक